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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1536 of 1855

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Page 1536

तं वः सखायो मदाय पुनानमभि गायत. शिशुं न यज्ञैः स्वदयन्त गूर्तिभिः.. (१)
हे ऋत्विज् मित्रो! देवों के नशे के लिए शुद्ध होने वाले सोम की स्तुति करो. बच्चे को
जिस प्रकार गहनों से सजाते हैं, उसी प्रकार यज्ञसाध्य हव्यों और स्तुतियों से सोम को
सुशोभित करो. (१)
सं वत्सइव मातृभिरिन्दुहि॑न्वानो अज्यते. देवावीर्मदो मतिभिः परिष्कृतः.. (२)
देवों के रक्षक, नशीले, स्तुतियों द्वारा सुशोभित एवं प्रेरित सोम जल के साथ उसी
प्रकार मिलाए जाते हैं, जिस प्रकार माता गाय अपने बछड़े को अपने थन से मिलाती है. (२)
अयं दक्षाय साधनोऽयं शर्धाय वीतये. अयं देवेभ्यो मधुमत्तमः सुतः.. (३)
ये सोम देवों के बल के साधन, वेगजनक और भक्ष्य बनते हैं एवं इंद्रादि देवों को मधुरता
प्रदान करते हैं. (३)
गोमन्न इन्दो अश्ववत्सुतः सुदक्ष धन्व. शु