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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1532 of 1855

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Page 1532

समु प्रिया अनूषत गावो मदाय घृष्वयः. सोमासः कृण्वते पथः पवमानास इन्दवः..
(८)
प्यारे एवं अत्यंत दीप्त स्तुतिवचन सोम की प्रशंसा करते हैं. शुद्ध होते हुए सोम अपने
छनने के लिए मार्ग बनाते हैं. (८)
य ओजिष्ठस्तमा भर पवमान श्रवाय्यम्. यः पञ्च चर्षणीरभि रयिं येन वनामहै.. (९)
हे सोम! तुम अपना परम ओजस्वी एवं प्रशंसनीय रस टपकाओ. पांच जनों के समीप
रहने वाले तुम्हारे रस द्वारा हम धन प्राप्त करें. (९)
सोमाः पवन्त इन्दवोऽस्मभ्यं गातुवित्तमाः.
मित्राः सुवाना अरेपसः स्वाध्यः स्वर्विदः.. (१०)
अत्यंत मार्गदर्शक, दीप्तिशाली, देवों के मित्र, पापरहित, उत्तम ध्यान वाले एवं सब कुछ
जानने वाले सोम निचुड़ते हुए हमारे पास आ रहे हैं. (१०)
सुष्वाणासो व्यद्रिभिश्चताना गोरधि त्वचि.
इषमस्मभ्यमभितः समस्वरन् वसुविदः.. (११)
गाय के चमड़े पर ज्ञात होते हुए, पत्थरों की सहायता से भली प्रकार निचोड़े गए एवं
धन प्राप्त कराने वाले सोम चारों ओर से भली-भांति शब्द कर रहे हैं. (११)
एते पूता विपश्चितः सोमासो दध्याशिरः.
सूर्यासो न दर्शतासो जिगत्नवो ध्रुवा घृते.. (१२)
दशापवित्र की सहायता से शुद्ध किए गए, मेधावी, दही से मिश्रित, जल में चलने वाले
एवं स्थिर सोम पात्रों में सूर्य के समान दिखाई देते हैं. (१२)
प्र सुन्वानस्यान्धसो मर्तो न वृत्त तद्वचः. अप श्वानमराधसं हता मखं न भृगवः.. (१३)
निचोड़े जाते हुए एवं उपभोग योग्य सोम का प्रसिद्ध शब्द यज्ञविघ्नकर्त्ता कुत्ते को दूर
करे. हे स्तोताओ! भृगुवंशी लोगों ने जैसे पहले भग को मारा था, उसी प्रकार तुम उस
यज्ञकर्म के बाधक कुत्ते को मारो. (१३)
आ जामिरत्के अव्यत भुजे न पुत्र ओण्योः.
सरज्जारो न योषणां वरो न योनिमासदम्.. (१४)
देवों के मित्र सोम दशापवित्र से इस प्रकार मिल जाते हैं, जिस प्रकार रक्षक माता-पिता
की भुजाओं में पुत्र आ जाता है. जार पुरुष जिस प्रकार स्त्री को पाने के लिए दौड़ता है, उसी
प्रकार सोम द्रोणकलश की ओर जाते हैं. (१४)
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