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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1507 of 1855

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Page 1507

लिए गाय के सफेद दूध के पास जाते हैं. स्तोत्रयुक्त, स्तुतियों के ज्ञाता एवं शोभन वीर्य वाले
सोम हिंसारहित हजारों मार्गों से सूक्ष्म छिद्रों वाले दशापवित्र को पार करके द्रोणकलश में
जाते हैं. (३)
रुजा दृळ्हा चिद्रक्षसः सदांसि पुनान इन्द ऊर्णुहि वि वाजान्.
वृश्चोपरिष्टात्तुजता वधेन ये अन्ति दूरादुपनायमेषाम्.. (४)
हे सोम! राक्षसों की दृढ़ नगरियों को नष्ट करो. हे दशापवित्र में शुद्ध होते हुए सोम!
हमारे लिए अन्न लाओ. तुम समीप या दूर से आने वाले राक्षसों के स्वामी को आयुध की
सहायता से काटो. (४)
स प्रत्न वन्नव्यसे विश्ववार सूक्ताय पथः कृणुहि प्राचः.
ये दुष्षहासो वनुषा बृहन्तस्ताँस्ते अश्याम पुरुकृत्पुरुक्षो.. (५)
हे सबके द्वारा वरण करने योग्य सोम! तुम प्राचीन काल के समान रहकर मुझ नवीन
सूत्रों और शोभन स्तुतियों वाले मार्गों को प्राचीन बनाओ. हे अनेक कर्मों वाले एवं अधिक
शब्द करने वाले सोम! तुम्हारे जो अंश राक्षसों के लिए असह्य, हिंसायुक्त एवं महान् हैं, उन्हें
हम यज्ञ में प्राप्त करें. (५)
एवा पुनानो अपः स्व१र्गा अस्मभ्यं तोका तनयानि भूरि.
शं नः क्षेत्रमुरु ज्योतिंषि सोम ज्योङ्नः सूर्य दृशये रिरीहि.. (६)
हे शुद्ध होते हुए सोम! तुम हमें जल, स्वर्ग, गाएं एवं पुत्र-पौत्र दो एवं हमारे खेतों का
कल्याण करो. हे सोम! अंतरिक्ष में ज्योतियों को विस्तृत करो एवं हमें चिरकाल तक सूर्य को
देखने दो. (६)
सूक्त—९२ देवता—पवमान सोम
परि सुवानो हरिरंशुः पवित्रे रथो न सर्जि सनये हियानः.
आपच्छ्लोकमिन्द्रियं पूयमानः प्रति देवाँ अजुषत प्रयोभिः.. (१)
जिस प्रकार युद्ध में शत्रुवध के लिए रथ तैयार किया जाता है, उसी प्रकार ऋत्विजों
द्वारा प्रेरित व हरे रंग वाले सोम देवों के संतोष के लिए दशापवित्र पर जाते हैं. शुद्ध होते हुए
सोम इंद्र संबंधी स्तोत्रों को प्राप्त करते हैं एवं हव्य अन्नों से देवों की सेवा करते हैं. (१)
अच्छा नृचक्षा असरत्पवित्रे नाम दधानः कविरस्य योनौ.
सीदन् होतेव सदने चमूषूपेमग्मन्नृषयः सप्त विप्राः.. (२)
मनुष्यों को देखने वाले व बुद्धिमान् सोम जल को धारण करते हैं एवं अपने स्थान
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