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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1508 of 1855

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Page 1508

दशापवित्र में उसी प्रकार फैलते हैं, जिस प्रकार होता देवों की स्तुति करने के लिए यज्ञ में
प्रवेश करता है. इसके बाद सोम चमू नामक पात्रों में जाते हैं. सात मेधावी ऋषि स्तोत्रों द्वारा
सोम के पास जाते हैं. (२)
प्र सुमेधा गातुविद्विश्वदेवः सोमः पुनानः सद एति नित्यम्.
भुवद्विश्लेषु काव्येषु रन्ताऽनुजनान्यतते पञ्च धीरः.. (३)
शोभन बुद्धि वाले, मार्गों के ज्ञाता एवं सभी देवों के समीपवर्ती सोम शुद्ध होकर
विनाशरहित द्रोणकलश में जाते हैं. सब स्तोत्रों में रमण करने वाले तथा धीर सोम पांच जनों
का अनुगमन करने का प्रयत्न करते हैं. (३)
तव त्ये सोम पवमान निन्ये विश्वे देवास्त्रय एकादशासः.
दश स्वधाभिरधि सानो अव्ये मृजन्ति त्वा नद्यः सप्त यह्वीः.. (४)
हे शुद्ध होते हुए सोम! ये तेंतीस देव तुम्हारे हैं एवं स्वर्ग में रहते हैं. दस उंगलियां भेड़ के
बालों से बने तथा पर्वत शिखर के समान ऊंचे दशापवित्र में तुम्हें जल के द्वारा शुद्ध करती हैं
एवं सात महान् नदियां तुम्हें पवित्र बनाती हैं. (४)
तन्नु सत्यं पवमानस्यास्तु यत्र विश्वे कारवः संनसन्त.
ज्योतिर्यदह्ने अकृणोदु लोकं प्रावन्मनुं दस्यवे करभीकम्.. (५)
पवमान सोम का वह प्रसिद्ध स्थान हमें प्राप्त हो, जहां सभी स्तोता एकत्र होते हैं. सोम
की जो ज्योति दिन के लिए प्रकाश देती हैं, उसने मनु की भली-भांति रक्षा की. सोम ने अपना
तेज राक्षसों के लिए नष्ट करने वाला किया था. (५)
परि सद्मेव पशुमान्ति होता राजा न सत्यः समितिरीयानः.
सोमः पुनानः कलशाँ अयासीत्सीदन्मृगो न महिषो वनेषु.. (६)
देवों को बुलाने वाले जिस प्रकार बलि पशुओं वाली यज्ञशाला में जाते हैं. सच्चे कामों
वाला राजा जिस प्रकार युद्ध में जाता है, उसी प्रकार पवित्र होते हुए सोम भैंसे के समान जल
में रहकर द्रोणकलश में जाते हैं. (६)
सूक्त—९३ देवता—पवमान सोम
साकमुक्षो मर्जयन्त स्वसारो दश धीरस्य धीतयो धनुत्रीः.
हरिः पर्यद्रवज्जाः सूर्यस्य द्रोणं ननक्षे अत्यो न वाजी.. (१)
एक साथ सींचने वाली एवं परस्पर बहिनों के समान दस उंगलियां सोम को शुद्ध करती
हैं. वे उंगलियां धीर सोम की प्रेरक हैं. हरे रंग वाले सोम सूर्य की पत्नी दिशाओं की ओर जाते
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