ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1506 of 1855
Read in contextअपः सिषासन्वृषसः स्वर्गाः सं चक्रदो महो अस्मभ्यं वाजान्.. (४)
हे विस्तृत मार्ग वाले सोम! तुम स्तोताओं को अभयदान देते हुए द्यावा-पृथिवी को
मिलाते हुए बरसो. तुम हमें महान् अन्न देने के लिए उषा, आदित्य एवं किरणों को प्राप्त करने
की इच्छा करते हुए शब्द करते हो. (४)
मत्सि सोम वरुणं मत्सि मित्रं मत्सीन्द्रमिन्दो पवमान विष्णुम्.
मत्सि शर्धो मारुतं मत्सि देवान्मत्सि महामिन्द्रमिन्दो मदाय.. (५)
हे दीप्तिशाली एवं शुद्ध होते हुए सोम! तुम वरुण, मित्र, विष्णु, शक्तिशाली मरुत्, इंद्र
एवं अन्य देवों को नशे के द्वारा तृप्त करो. (५)
एवा राजेव क्रतुमाँ अमेन विश्वा घनिघ्नद दुरिता पवस्व.
इन्दो सूक्ताय वचसे वयो धा यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (६)
हे यज्ञयुक्त सोम! तुम राजा के समान शक्ति द्वारा सारे पापों को नष्ट करते हुए टपको. हे
दीप्तिशाली सोम! हमारा सुंदर स्तोत्र सुनकर हमें अन्न दो एवं हमें कल्याणप्रद साधनों द्वारा
रक्षित करो. (६)
सूक्त—९१ देवता—पवमान सोम
असर्जि वक्वा रथे यथाजौ धिया मनोता प्रथमो मनीषी.
दश स्वसारो अधि सानो अव्येऽजन्ति वह्निं सदनान्यच्छ.. (१)
युद्धभूमि में जैसे घोड़े की मालिश की जाती है, उसी प्रकार यज्ञ में शब्द करने वाले,
देवों के मनचाहे, देवों में श्रेष्ठ एवं स्तुतियों के स्वामी सोम स्तुतियों के साथ निर्मित किए जाते
हैं. सगी बहिनों के समान दस उंगलियां यज्ञशाला की ओर फल ढोने वाले सोम को भेड़ों के
बालों से बने दशापवित्र रूपी ऊंचे स्थान की ओर प्रेरित करती हैं. (१)
वीती जनस्य दिव्यस्य कव्यैरधि सुवानो नहुष्येभिरिन्दुः.
प्र यो नृभिर्मृतो मर्त्येभिर्मृजानोऽविभिर्गोभिरद्भिः.. (२)
नहुषवंशी स्तोताओं द्वारा निचोड़े हुए एवं देवों के समीप रहने वाले सोम यज्ञ में आते हैं.
मरणरहित सोम मरणधर्मा ऋत्विजों द्वारा भेड़ के बालों से बने दशापवित्र, गाय के चमड़े एवं
जल द्वारा शुद्ध होते हुए यज्ञ में जाते हैं. (२)
वृषा वृष्णे रोरुवदंशुरस्मै पवमानो रुशदीर्ते पयो गोः.
सहस्रमृक्वा पथिभिर्वचोविदध्वस्मभिः सूरो अण्वं वि याति.. (३)
अभिलाषापूरक, अधिक शब्द करने वाले एवं शुद्ध होने वाले सोम वर्षक इंद्र के पीने के
ebook converter DEMO Watermarks*