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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1503 of 1855

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Page 1503

आदीं विश्वा नहुष्याणि जाता स्वर्षाता वन ऊर्ध्वा नवन्त.. (२)
लोग बहुत सा धन लाने के लिए रथ के समान भार ढोने वाले महान् सोम को रथ के
समान ही जीतते हैं. युद्ध के अभिलाषी मनुष्य महान् धन देने वाले सोम को संग्राम में ले जाते
हैं. (२)
वायुर्न यो नियुत्वाँ इष्टयामा नासत्येव हव आ शम्भूविष्ठः.
विश्ववारो द्रविणोदाइव त्मन्यूषेव धीजवनोऽसि सोम.. (३)
हे सोम! तुम वायु के समान अश्वों वाले तथा मनचाहे स्थान पर जाने वाले,
अश्विनीकुमारों के समान पुकार सुनते ही सबको सुख देने वाले, धन देने वाले के समान
सबके वरणीय एवं सूर्य के समान मनोवेग वाले हो. (३)
इन्द्रो न यो महा कर्माणि चक्रिर्हन्ता वृत्राणामसि सोम पूर्भित्.
पैद्वो न हि त्वमहिनाम्नां हन्ता विश्वस्यासि सोम दस्योः.. (४)
हे सोम! तुमने इंद्र के समान महान् कर्म किए हैं. तुम शत्रुओं के नाशक एवं उनके नगरों
को तोड़ने वाले हो. तुम अहिवंश के लोगों को घोड़े के समान जल्दी आकर मारते हो. तुम
सब शत्रुओं को मारने वाले हो. (४)
अग्निर्न यो वन आ सृज्यमानो वृथा पाजांसि कृणुते नदीषु.
जनो न युध्वा महत उपब्दिरियर्ति सोमः पवमान ऊर्मिम्.. (५)
जिस तरह अग्नि वन में उत्पन्न होकर अपनी शक्ति दिखाते हैं, उसी तरह सोम जल में
पैदा होकर अपना बल दिखाते हैं. सोम युद्ध करने वाले वीर के समान शत्रु के पास भयंकर
शब्द करते हुए अधिक रस को प्रेरित करते हैं. (५)
एते सोमा अति वाराण्यव्या दिव्या न कोशासो अभ्रवर्षाः.
वृथा समुद्रं सिन्धवो न नीचीः सुतासो अभि कलशाँ असृग्रन्.. (६)
जैसे अंतरिक्ष से बरसने वाली मेघवर्षा एवं नदियां अपने-आप नीचे की ओर जाती हैं,
उसी प्रकार यह छनते हुए सोम भेड़ के बालों से बने दशापवित्र को पार करके द्रोणकलश की
ओर जाते हैं. (६)
शुष्मी शर्धो न मारुतं पवस्वानऽभिशस्ता दिव्या यथा विट्.
आपो न मक्षू सुमतिर्भवा नः सहस्राप्साः पृतनाषाण् यज्ञः.. (७)
हे शक्तिशाली सोम! तुम मरुतों की शक्ति के समान टपको. तुम स्वर्ग की प्रजाओं के
समान अनिद्रित रूप से बहो एवं जल के समान हमें शीघ्र मुक्ति दो. हे अनेक रूपों वाले
सोम! तुम सेना को जीतने वाले इंद्र के समान यज्ञ के पात्र हो. (७)
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