ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1504 of 1855
Read in contextराज्ञो नु ते वरुणस्य व्रतानि बृहद्गभीरं तव सोम धाम.
शुचिष्ट्वमसि प्रियो न मित्रो दक्षाय्यो अर्यमेवासि सोम.. (८)
हे सोम! मैं तुम्हारे यज्ञकर्मों को राजा वरुण के समान शीघ्र करता हूं. तुम्हारा तेज
विशाल एवं गंभीर है. तुम प्रिय मित्र के समान शुचि हो एवं अर्यमादेव के समान पूज्य हो. (८)
सूक्त—८९ देवता—पवमान सोम
प्रो स्य वह्निः पथ्याभिरस्यान्दिवो न वृष्टिः पवमानो अक्षाः.
सहस्रधारो असदन्य१स्मे मातुरुपस्थे वन आ च सोमः.. (१)
फल वहन करने वाले सोम यज्ञ के मार्गों से आकाश की वर्षा के समान बहते हैं. हजार
धाराओं वाले सोम हमारे पास या द्युलोक के पास बैठते हैं. (१)
राजा सिन्धूनामवसिष्ट वास ऋतस्य नावमारुहद्रजिष्ठाम्.
अप्सु द्रप्सो वावृधे श्येनजूतो दुह ईं पिता दुह ईं पितुर्जाम्.. (२)
गायों के राजा सोम दूध में मिलते हैं एवं यज्ञरूपी सरलगामिनी नाव में बढ़ते हैं. बाज
पक्षी द्वारा लाए गए सोम जलों में बढ़ते हैं. अध्वर्यु एवं अन्य लोक द्युलोक के पुत्र सोम को
दुहते हैं. (२)
सिंहं नसन्त मध्वो अयासं हरिमरुषं दिवो अस्य पतिम्.
शूरो युत्सु प्रथमः पृच्छते गा अस्य चक्षसा परि पात्युक्षा.. (३)
यजमान शत्रुनाशक, जलप्रेरक, हरे रंग वाले और द्युलोक के पालक सोम को व्याप्त
करते हैं. युद्धों में शूर एवं देवों में प्रमुख सोम पणियों द्वारा चुराई हुई गायों वाले स्थान का
मार्ग पूछते हैं. इंद्र सोम की सहायता से ही विश्व का पालन करते हैं. (३)
मधुपृष्ठं घोरमयासमश्वं रथे युञ्जन्त्युरुचक्र ऋषभम्.
स्वसार ईं जामयो मर्जयन्ति सनाभयो वाजिनमूर्जयन्ति.. (४)
मीठे पिछले भाग वाला, भयानक, गतिशील एवं सुंदर सोम यज्ञ में उसी प्रकार पकड़ा
जाता है, जैसे रथ में घोड़े को जोतते हैं. उंगलियां बहिनों और भाइयों के समान आपस में
मिलकर सोम को शुद्ध करती हैं एवं समान नियम पालन करने वाले अध्वर्यु सोम को
शक्तिशाली बनाते हैं. (४)
चतस्र ईं घृतदुहः सचन्ते समाने अन्तर्धरणे निषत्ताः.
ता ईमर्षन्ति नमसा पुनानास्ता ईं विश्वतः परि षन्ति पूर्वीः.. (५)
घी देने वाली चार गाएं इस सोम की सेवा करती हैं. वे गाएं सबको धारण करने वाले
ebook converter DEMO Watermarks*