ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextहे इंद्र! तुम स्वर्गलोक के अमृत टपकाने वाले स्थान पर स्वर्ग प्राप्त कराने वाले, धरती
के यज्ञस्थल अथवा अन्न देने वाले अंतरिक्ष में प्रसन्न होते हो. (२)
आ त्वा गीर्भिर्महामुरुं हुवे गामिव भोजसे. इन्द्र सोमस्य पीतये.. (३)
हे महान् एवं विशाल इंद्र! मैं तुम्हें सोमरस पीने के लिए उसी प्रकार बुलाता हूं, जिस
प्रकार गाय को घास खाने के लिए बुलाया जाता है. (३)
आ त इन्द्र महिमानं हरयो देव ते महः. रथे वहन्तु बिभ्रतः.. (४)
हे इंद्र! रथ में जुड़े हुए घोड़े तुम्हारे महत्त्व को तेज करके भली प्रकार वहन करें. (४)
इन्द्र गृणीष उ स्तुषे महाँ उग्र ईशानकृत्. एहि नः सुतं पिब.. (५)
हे महान्, उग्र एवं ऐश्वर्यकारी इंद्र! लोगों द्वारा तुमसे याचना की जाती है एवं तुम्हारी
स्तुति की जाती है. आकर हमारा सोमरस पिओ. (५)
सुतावन्तस्त्वा वयं प्रयस्वन्तो हवामहे. इदं नो बर्हिरासदे.. (६)
हे इंद्र हम सोमरस निचोड़कर एवं चरु पुरोडाश आदि लेकर अपने इन कुशों पर बैठने
के लिए तुम्हें बुलाते हैं. (६)
यच्चिद्धि शश्वतामसीन्द्र साधारणस्त्वम्. तं त्वा वयं हवामहे.. (७)
हे इंद्र! तुम बहुत से यजमानों के प्रति समान व्यवहार करने वाले हो. इसलिए हम तुम्हें
बुलाते हैं. (७)
इदं ते सोम्यं मध्वधुक्षन्नद्रिभिर्नरः. जुषाण इन्द्र तत्पिब.. (८)
हे इंद्र! हमारे अध्वर्युगण पत्थरों की सहायता से तुम्हारे लिए मधुर सोमरस निचोड़ते हैं.
तुम प्रसन्न होकर उसे पिओ. (८)
विश्वाँ अर्यो विपश्चितोऽति ख्यस्तूम्या गहि. अस्मे धेहि श्रवो बृहत्.. (९)
हे स्वामी इंद्र! तुम सभी स्तोताओं का अतिक्रमण करके मुझे देखो, शीघ्र आओ एवं
विस्तृत यश दो. (९)
दाता मे पृषतीनां राजा हिरण्यवीनाम्. मा देवा मघवा रिषत्.. (१०)
हिरण्यवर्ण गाएं देने वाले इंद्र हमारे राजा हों. हे देवो! इंद्र हमारी हिंसा न करें. (१०)
सहस्रे पृषतीनामधिश्चन्द्रं बृहत्पृथु. शुक्रं हिरण्यमा ददे.. (११)