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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1293 of 1855

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Page 1293

आ घा ये अग्निमिन्धते स्तृणन्ति बर्हिरानुषक्. येषामिन्द्रो युवा सखा.. (१)
युवा इंद्र जिनके मित्र हैं, वे ऋषि मिलकर अग्नि को भली प्रकार जाते हैं एवं कुश
बिछाते हैं. (१)
बृहन्निदिध्म एषां भूरि शस्तं पृथुः स्वरुः. येषामिन्द्रो युवा सखा.. (२)
युवा इंद्र जिनके मित्र हैं, उन ऋषियों की समिधाएं बड़ी हैं, स्तोत्र बहुत हैं और यज्ञ
महान् हैं. (२)
अयुद्ध इद्युधा वृतं शूर आजति सत्वभिः. येषामिन्द्रो युवा सखा.. (३)
युवा इंद्र जिनके मित्र हैं, ऐसे व्यक्ति योद्धा न होने पर भी शत्रुओं द्वारा घिर कर अपनी
शक्ति से वीरतापूर्वक उन्हें झुकाते हैं. (३)
आ बुन्दं वृत्रहा ददे जातः पृच्छद्वि मातरम्. क उग्राः के ह शृण्विरे.. (४)
इंद्र ने उत्पन्न होते ही बाण उठा लिया और अपनी माता से पूछा—“उग्र एवं शक्ति द्वारा
प्रसिद्ध कौन है?” (४)
प्रति त्वा शवसी वदद् गिरावप्सो न योधिसत्. यस्ते शत्रुत्वमाचके.. (५)
हे इंद्र! शक्तिशालिनी माता ने तुम्हें उत्तर दिया—“जो तुम्हारे साथ शत्रुता का आचरण
करता है वह पर्वत पर दर्शनीय हाथी के समान युद्ध करता है.” (५)
उत त्वं मघवञ्छृणु यस्ते वष्टि ववक्षि तत्. यद्वीळयासि वीळु तत्.. (६)
हे धन वाले इंद्र! तुम हमारी स्तुति सुनो. तुम्हारा स्तोता जो चाहता है, उसे तुम वही देते
हो. तुम जिसे दृढ़ करते हो, वह अवश्य दृढ़ हो जाता है. (६)
यदाजिं यात्याजिकृदिन्द्रः स्वश्वयुरूप. रथीतमॊ रथीनाम्.. (७)
युद्धकर्त्ता एवं शोभन अश्व वाले अभिलाषी इंद्र जब युद्ध करने जाते हैं तब वे रथियों में
सबसे प्रधान होते हैं. (७)
वि षु विश्वा अभियुजो वज्रिन्विष्वग्यथा वृह. भवा नः सुश्रवस्तमः.. (८)
हे वज्रधारी इंद्र! तुम इस प्रकार बढ़ो कि तुमसे सारी प्रजा वृद्धि को प्राप्त हो. तुम हमारे
लिए सर्वाधिक अन्न देने वाले बनो. (८)
अस्माकं सु रथं इन्द्रः कृणोतु सातये. न यं धूर्वन्ति धूर्तयः.. (९)
वे इंद्र हमें अभीष्ट फल देने के लिए अपना सुंदर रथ हमारे सामने स्थापित करें, जिनकी