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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1243 of 1855

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Page 1243

सखाय आ शिषामहि ब्रह्मेन्द्राय वज्रिणे. स्तुष ऊ षु वो नृतमाय धृष्णवे.. (१)
हे मित्र एवं ऋत्विजो! हम वज्रधारी इंद्र के लिए यह स्तोत्र बनावेंगे. तुम्हारे कल्याण के
लिए युद्धों का नेतृत्व करने वाले एवं शत्रुओं को हराने वाले इंद्र की मैं स्तुति करूंगा. (१)
शवसा ह्यसि श्रुतो वृत्रहत्येन वृत्रहा. मघैर्मघोनो अति शूर दाशसि.. (२)
हे इंद्र! तुम शक्ति के कारण प्रसिद्ध हो एवं वृत्र को मारने के कारण वृत्रहर कहलाते हो.
हे शूर इंद्र! तुम धनवान् व्यक्ति को धन देकर अधिक धनी बनाते हो. (२)
स नः स्तवान आ भर रयिं चित्रश्रवस्तमम्. निरेके चिद्यो हरिवो वसुर्ददिः.. (३)
हे इंद्र! तुम हमारी स्तुति सुनकर हमें नानाविध अन्नों से युक्त धन अधिक मात्रा में दो. हे
हरि नामक घोड़ों के स्वामी इंद्र! तुम निकलते समय ही शत्रुओं को भगाने वाले एवं हमें धन
देने वाले होते हो. (३)
आ निरेकमुत प्रियमिन्द्र दर्षि जनानाम्. धृषता धृष्णो स्तवमान आ भर.. (४)
हे शत्रुनाशक इंद्र! तुम हमारी स्तुति सुनकर हम स्तोताओं को प्रिय धन दिखाओ एवं
तुष्ट मन द्वारा वह धन हमें दो. (४)
न ते सव्यं न दक्षिणं हस्तं वरन्त आमुरः. न परिबाधो हरिवो गविष्टिषु.. (५)
हे हरि नामक घोड़ों वाले इंद्र! गायों को खोजते समय विरोधी पक्ष के योद्धा न तुम्हारा
बायां हाथ हटा सकते हैं और न दायां. संग्राम में बाधा पहुंचाने वाले असुर भी यह नहीं कर
सकते. (५)
आ त्वा गोभिरिव व्रजं गीर्भिऋणोम्यद्रिवः. आ स्मा कामं जरितुरा मनः पृण.. (६)
हे वज्रधारी इंद्र! लोग जिस प्रकार गायों के साथ गोशाला में जाते हैं, इसी प्रकार मैं
स्तुतियों के साथ तुम्हारे पास आता हूं. तुम मुझ स्तोता की धन संबंधी अभिलाषा एवं
मनोकामना पूरी करो. (६)
विश्वानि विश्वमनसो धिया नो वृत्रहन्तम. उग्र प्रणेतरधि षू वसो गहि.. (७)
हे असुर-विनाशकों में श्रेष्ठ, उग्र, निवासस्थान देने वाले एवं नेता इंद्र! विश्वमना ऋषि के
सभी स्तोत्रों को सुनकर आओ. (७)
वयं ते अस्य वृत्रहन्विद्याम शूर नव्यसः. वसोः स्पार्हस्य पुरुहूत राधसः.. (८)
हे वृत्रनाशक, शूर एवं बहुतों द्वारा बुलाए गए इंद्र! हम तुम्हारी कृपा से नवीन, चाहने
योग्य एवं सुखसाधक धन प्राप्त करें. (८)
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