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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1120 of 1855

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Page 1120

स्थान कहा गया है. जिस प्रकार तेज चलने वाला घोड़ा अपने स्थान पर शांत रहता है, उसी
प्रकार सुखदायक पीठ वाला घोड़ा तुम्हारे पास रहे. (१)
सिषक्ति सा वां सुमतिश्चनिष्ठातापि घर्मो मनुषो दुरोणे.
यो वां समुद्रान्त्सरितः पिपर्त्येत्तग्वा चिन्न सुयुजा युजानः.. (२)
हे अश्विनीकुमारो! अतिशय अन्नयुक्त शोभनस्तुति तुम्हारी सेवा करती है. धूप मानवों
की यज्ञशाला में तप रही है. वह धूप तुम्हें प्राप्त करने के लिए नदियों और सागरों को वर्षा
द्वारा भरती है. जिस प्रकार रथ में घोड़े जोड़े जाते हैं, उसी प्रकार तुम्हें यज्ञ में युक्त किया
जाता है. (२)
यानि स्थानान्यश्विना दधाथे दिवो यह्वीष्बोषधीषु विक्षु.
नि पर्वतस्य मूर्धनि सदन्तेषं जनाय दाशुषे वहन्ता.. (३)
हे अश्विनीकुमारो! तुम स्वर्ग लोक से आकर विशाल ओषधियों एवं प्रजाओं में जो स्थान
धारण करते हो, उसे हव्यदाता यजमान को दो और स्वयं पर्वत की चोटी पर स्थित बनो. (३)
चनिष्ठं देवा ओषधीष्वप्सु यद्योग्या अश्व्रवैथे ऋषीणाम्.
पुरूणि रत्ना दधतौ न्य१स्मे अनुपूर्वाणि चख्यथुर्युगानि.. (४)
हे अश्विनीकुमारो! तुम हमारी ओषधियों एवं जल की अभिलाषा करो, क्योंकि तुम
ऋषियों की इन वस्तुओं को स्वीकार करते हो. तुमने पूर्ववर्ती दंपतियों को आकृष्ट किया था.
तुम हमें अनेक रत्न दो. (४)
शुश्रूवांसा चिदश्विना पुरूण्यभि ब्रह्माणि चक्षाथे ऋषीणाम्.
प्रति प्र यातं वरमा जनायास्मे वामस्तु सुमतिश्चनिष्ठा.. (५)
हे अश्विनीकुमारो! तुमने स्तुतियां सुनकर ऋषियों के अनेक यज्ञकर्मों को देखा है. तुम
मुझ यजमान के घर में आओ. तुम अन्न के विषय में हम पर कृपा करो. (५)
यो वां यज्ञो नासत्या हविष्मान् कृतब्रह्मा समर्यो३ भवाति.
उप प्र यातं वरमा वसिष्ठमिमा ब्रह्माण्यृच्यन्ते युवभ्याम्.. (६)
हे अश्विनीकुमारो! जो स्तुतिपरायण, हव्ययुक्त एवं ऋत्विजों से युक्त वसिष्ठ तुम्हारा
यजमान है, उसी श्रेष्ठ के पास जाओ. ये स्तुतियां यहां आने के लिए तुम्हारी स्तुति करती हैं.
(६)
इयं मनीषा इयमश्विना गीरिमां सुवृक्तिं वृषणा जुषेथाम्.
इमा ब्रह्माणि युवयून्यग्मन्यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (७)
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