ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextहे अभिलाषापूरक अश्विनीकुमारो! यह स्तुति एवं यह वाणी तुम्हारे लिए है. तुम इस
शोभनस्तुति को स्वीकार करो. ये समस्त यज्ञकर्म तुम्हारी कामना करते हुए तुम्हें प्राप्त हों. हे
देवो! कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (७)
सूक्त—७१ देवता—अश्विनीकुमार
अप स्वसुरुषसो नग्जिहीते रिणक्ति कृष्णीररुषाय पन्थाम्.
अश्वामघा गोमघा वां हुवेम दिवा नक्तं शरुमस्मद्युयोतम्.. (१)
रात अपनी बहिन उषा के पास से हट जाती है. काली रात उजले दिन के लिए रास्ता
छोड़ती है. हे अश्व एवं गोरूप धनों के स्वामी अश्विनीकुमारो! हम तुम्हें बुलाते हैं. तुम रात-
दिन हमारे पास से शत्रुओं को दूर करो. (१)
उपायातं दाशुषे मर्त्याय रथेन वाममश्विना वहन्ता.
युयुतमस्मदनिराममीवां दिवा नक्तं माध्वी त्रासीथां नः.. (२)
हे अश्विनीकुमारो! तुम अपने रथ द्वारा हव्य देने वाले यजमान के लिए उत्तम धन लाते
हुए आओ एवं अन्न की कमी और रोग हमसे दूर रहे. मधुस्वामी अश्विनीकुमारो! तुम रात-दिन
हमारी रक्षा करो. (२)
आ वां रथमवमस्यां व्युष्टौ सुम्नायवो वृषणो वर्तयन्तु.
स्यूमगभस्तिमृतयुग्भिरश्वैराश्विना वसुमन्तं वहेथाम्.. (३)
हे अश्विनीकुमारो! सुखपूर्वक जोते गए एवं कामवर्षक घोड़े उषाकाल होने पर तुम्हारे
रथ को यहां लावें. सुखदायक किरणों वाले एवं धनयुक्त रथ को तुम जल प्रदान करने वाले
अश्वों की सहायता से आगे बढ़ाओ. (३)
यो वां रथो नृपती अस्ति वोळ्हा त्रिवन्धुरो वसुमाँ उस्रयामा.
आ न एना नासत्योप यातमभि यद्वां विश्वप्सन्यो जिगाति.. (४)
हे यजमानों का पालन करने वाले अश्विनीकुमारो! तुम्हारा रथ वहन करने वाला, तीन
वंधुरा वाला, धनयुक्त, दिनभर चलने वाला एवं व्यापकरूप से गतिशील है. मैं उसी रथ द्वारा
आने के लिए तुम्हारी स्तुति कर रहा हूं. (४)
युवं च्यवानं जरसोऽमुमुक्तं नि पेदव ऊहथुराशुमश्वम्.
निरंहसस्तमसः स्पर्तमत्रिं नि जाहुषं शिथिरे धातमन्तः.. (५)
हे अश्विनीकुमारो! तुमने च्यवन की वृद्धावस्था दूर की, पेदु नामक राजा के लिए युद्ध में
तेज चलने वाला घोड़ा भेजा, अत्रि को पाप एवं अंधेरे को पार किया एवं जाहुष को
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