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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1076 of 1855

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Page 1076

तन्न इन्द्रो वरुणो मित्रो अग्निरप ओषधीर्वनिनो जुषन्त.
शर्मन्त्स्याम मरुतामुपस्थे यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (२५)
इंद्र, वरुण, मित्र, अग्नि, जल, ओषधियां एवं वृक्ष हमारे इस स्तोत्र को सुनें. मरुतों के
समीप रहकर हम सुखी रहेंगे. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (२५)
सूक्त—३५        देवता—विश्वेदेव
शं न इन्द्राग्नी भवतामवोभिः शं न इन्द्रावरुणा रातहव्या.
शमिन्द्रासोमा सुविताय शं योः शं न इन्द्रापूषणा वाजसातौ.. (१)
इंद्र एवं अग्नि अपने रक्षासाधनों द्वारा हमारे लिए शांतिकारक हों. यजमानों द्वारा हव्य
प्राप्त करने वाले इंद्र एवं वरुण हमारे लिए शांतिदाता हों. इंद्र एवं सोम हमारे लिए शांति तथा
सुख के कारण बनें. इंद्र तथा पूषा हमें युद्ध में शांतिकारक हों. (१)
शं नो भगः शमु नः शंसो अस्तु शं नः पुरन्धिः शमु सन्तु रायः.
शं नः सत्यस्य सुयमस्य शंसः शं नो अर्यमा पुरुजातो अस्तु.. (२)
भग एवं नराशंस हमारे लिए शांति देने वाले हों. पुरंधि एवं समस्त संपत्तियां हमें शांति
दें. शोभन यम से युक्त सत्य का वचन हमें शांतिदाता हो. अनेक बार उत्पन्न अर्यमा हमारे लिए
शांति दें. (२)
शं नो धाता शमु धर्ता नो अस्तु शं न उरूची भवतु स्वधाभिः.
शं रोदसी बृहती शं नो अद्रिः शं नो देवानां सुहवानि सन्तु.. (३)
धाता देव एवं धर्ता वरुण हमें शांति दें. अन्नों के साथ धरती हमें शांति दे. विशाल द्यावा-
पृथिवी हमें शांति दें. देवों की उत्तम स्तुतियां हमें शांति दें. (३)
शं नो अग्निर्ज्योतिरनीको अस्तु शं नो मित्रावरुणावश्विना शम्.
शं नः सुकृतां सुकृतानि सन्तु शं न इषिरो अभि वातु वातः.. (४)
ज्योतिरूपी मुख वाले अग्नि हमें शांति दें. मित्र, वरुण एवं अश्विनीकुमार हमें शांति दें.
उत्तम कर्म करने वाले के उत्तम कर्म हमें शांति दें. चलने वाली हवा हमें शांति दे. (४)
शं नो द्यावापृथिवी पूर्वहूतौ शमन्तरिक्षं दृशये नो अस्तु.
शं न ओषधीर्वनिनो भवन्तु शं नो रजसस्पतिरस्तु जिष्णुः.. (५)
द्यावा-पृथिवी पहली बार पुकारने पर ही हमें शांति दें. अंतरिक्ष हमारे देखने के लिए
शांतिदाता हो. ओषधियां तथा वृक्ष हमें शांति दें. लोक के पति इंद्र हमें शांति दें. (५)
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