ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1075 of 1855
Read in contextमा नोऽहर्बुध्न्यो रिषे धान्मा यज्ञो अस्य स्रिधदृतायोः.. (१७)
अग्नि हमें हिंसक के हाथ में न सौंपे. यज्ञ की कामना करने वाले का यज्ञ क्षीण न हो.
(१७)
उत न एषु नृषु श्रवो धुः प्र राये यन्तु शर्धन्तो अर्यः.. (१८)
देवगण हमारे मनुष्यों के लिए अन्नधारण करें एवं धन के लिए उत्साहित शत्रु मर जावें.
(१८)
तपन्ति शत्रुं स्वर्णि भूमा महासेनासो अमेभिरेषाम्.. (१९)
जैसे सूर्य धरती को तप्त करता है, उसी प्रकार विशाल सेना वाले राजा देवों के बल से
अपने शत्रु को बाधा पहुंचाते हैं. (१९)
आ यन्नः पत्नीर्गमन्त्यच्छा त्वष्टा सुपाणिर्दधातु वीरान्.. (२०)
जब देवपत्नियां हमारे सामने आती हैं, तब शोभनहाथ वाले त्वष्टा हमें पुत्र दें. (२०)
प्रति नः स्तोमं त्वष्टा जुषेत स्यादस्मे अरमतिर्वसूह्युः.. (२१)
त्वष्टा हमारे स्तोत्रों को स्वीकार करें. पर्याप्त बुद्धि वाले त्वष्टा हमें धन देने के इच्छुक हों.
(२१)
ता नो रासन्नातिषाचो वसून्या रोदसी वरुणानी शृणोतु.
वरूत्रीभिः सुशरणो नो अस्तु त्वष्टा सुदत्रो वि दधातु रायः.. (२२)
दान देने में कुशल देवपत्नियां हमें धन दें. द्यावा-पृथिवी और वरुणपत्नी हमारा स्तोत्र
सुनें. कल्याण देने वाले त्वष्टा उपद्रवों का निवारण करने वाली देवपत्नियों के साथ हमारे लिए
शरण बनें एवं हमें धन दें. (२२)
तन्नो रायः पर्वतास्तन्न आपस्तद्रातिषाच ओषधीरुत द्यौः.
वनस्पतिभिः पृथिवी सजोषा उभे रोदसी परि पासतो नः.. (२३)
पर्वत समूह, समस्त जल, दानकुशल देवपत्नियां, ओषधियां एवं स्वर्ग हमारे उस धन का
पालन करें. द्यावा-पृथिवी हमारी रक्षा करें. (२३)
अनु तदुर्वी रोदसी जिहातामनु द्युक्षो वरुण इन्द्रसखा.
अनु विश्वे मरुतो ये सहासो रायः स्याम धरुणं धियध्यै.. (२४)
हम धारण करने योग्य धन के पात्र हों. विस्तृत द्यावा-पृथिवी दीप्ति के निवास इंद्र, इंद्र
के मित्र वरुण एवं शत्रु का पराभव करने वाले मरुद्गण हमारा अनुगमन करें. (२४)
ebook converter DEMO Watermarks*