ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1077 of 1855
Read in contextशं न इन्द्रो वसुभिर्देवो अस्तु शमादित्येभिर्वरुणः सुशंसः.
शं नो रुद्रो रुद्रेभिर्जलाषः शं नस्त्वष्टा ग्नाभिरिह शृणोतु.. (६)
वसुओं के साथ इंद्र देव हमें शांति दें. शोभनस्तुति वाले वरुण आदित्यों के साथ हमें
शांति दें. दुःखनाशक रुद्र रुद्रों के साथ हमें शांति दें. इस यज्ञ में त्वष्टादेव पत्नियों के साथ हमें
शांति दें एवं हमारी स्तुतियां सुनें. (६)
शं नः सोमो भवतु ब्रह्म शं नः शं नो ग्रावाणः शमु सन्तु यज्ञाः.
शं नः स्वरूणां मितयो भवन्तु शं नः प्रस्व१: शम्वस्तु वेदिः.. (७)
सोम एवं स्तुतिसमूह हमें शांति दें. सोम कूटने के साधन पत्थर एवं यज्ञ हमें शांति दें.
यूपों के नाम हमें शांति दें. ओषधियां एवं यज्ञदेवी हमारे लिए शांतिकारक हों. (७)
शं नः सूर्य उरुचक्षा उदेतु शं नश्चतस्रः प्रदिशो भवन्तु.
शं नः पर्वता ध्रुवयो भवन्तु शं नः सिन्धवः शमु सन्त्वापः.. (८)
विस्तृत तेज वाला सूर्य हमारी शांति के लिए उदित हो. चारों महादिशाएं हमारी शांति के
लिए हों. दृढ़ पर्वत हमें शांति दें. नदियां एवं जल हमें शांति दें. (८)
शं नो अदितिर्भवतु व्रतेभिः शं नो भवन्तु मरुतः स्वर्काः.
शं नो विष्णुः शमु पूषा नो अस्तु शं नो भवित्रं शम्वस्तु वायुः.. (९)
यज्ञकर्मों के साथ अदिति हमें शांति दें. शोभनस्तुति वाले मरुद्गण हमारे लिए
शांतिकारक हों. विष्णु एवं पूषा हमारे लिए शांति दें. अंतरिक्ष एवं वायु हमारे लिए शांति दें.
(९)
शं नो देवः सविता त्रायमाणः शं नो भवन्तूषसो विभातीः.
शं नः पर्जन्यो भवतु प्रजाभ्यः शं नः क्षेत्रस्य पतिरस्तु शम्भुः.. (१०)
रक्षा करते हुए सविता देव हमें शांति दें. अंधकार का नाश करती हुई उषाएं हमें शांति
दें. बादल हमारी प्रजा के लिए शांतिकारक हों. सुख देने वाले क्षेत्रपति हमें शांति दें. (१०)
शं नो देवा विश्वदेवा भवन्तु शं सरस्वती सह धीभिरस्तु.
शमभिषाचः शमु रातिषाचः शं नो दिव्याः पार्थिवाः शं नो अप्याः.. (११)
दीप्तियुक्त विश्वेदेव हमें शांति दें. सरस्वती यज्ञकर्मों के साथ हमें शांति दें. यज्ञ एवं दान
करने वाले हमें शांति दें. स्वर्ग, पृथिवी एवं अंतरिक्ष हमें शांति दें. (११)
शं नः सत्यस्य पतयो भवन्तु शं नो अर्वन्तः शमु सन्तु गावः.
शं न ऋभवः सुकृतः सुहस्ताः शं नो भवन्तु पितरो हवेषु.. (१२)
ebook converter DEMO Watermarks*