रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)
Rasikapriya: Nayika Bheda, Shringara Rasa evam Saundarya Manovigyan
by महाकवि केशवदास
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Read in context२६० रसकप्रिया
लीनो हम मोल ।७।२७ सोचि सखी भरि ।८।३३
लोकलीक उल्लंघि ।६।६ सोधि निदाननि ।५।३३
लोचन ऐंचि ।४।८ सो नवजोबनभूषिता ।३।२०
लोचन बीच चुभी ।८।२४ सो प्रकास संजोग ।१२।१
लोल अमोल ।१२।२१ सो प्रच्छन्न ।१।१६
वा मृगनैनी ज्यों ।१२।२६ सोभा को सघन ।१२।५
श्रम अभिलाष ।६।३६ सोरहई सिंगार ।३।४२ सू
श्रीवृषभानुकुमारिहेत ।१।२ सो लब्धापति ।३।५७
संपति विपति ।३।१५ सो समस्तरसकोबिदा ।३।५१
संबत सोरह सै ।१।११ सोंह को सोचु ।२।१७
सखि गोकुल गोप ।६।५६ सौंहनि को सोच ।१३।१६
सखि ज्यों उनको ।६।१७ सौंहें दिवाय ।४।१५
सखि बात सुनौ ।१४।१७ स्तंभ स्वेद ।६।१०
सजल चकित ।८।४४ स्वाधिनपतिका, उत्कहीँ ।७।२
सब तें पर ।३।६७ स्वेद मदन-जल ।३।१२
सब तें होइ उदास ।१४।३७ हँसत कहत ।३।४
सब देह भई ।३।१३ हँसत खेलत ।५।२८
सब विभाव ।६।४ हँसति हँसति ।१०।१०
सलज सुबुद्धि ।३।३ हँसि बोलतहीं ।१६।३
सहज सुगंध ।३।२ हरित हरित ।१२।४
साम दान ।१०।२ हरि राधिका ।५।३६
सिक्षा, विनय ।१३।१ हरि से हितू ।२।८
सिबै हारी सखी ।१३।१२ हाँसी में बातक ।१२।१२
सिगरी मध्या तीन ।३।४५ हाँसी में हँसे ।१२।२२
सीतल समीर ।१२।५ हित कै इत ।३।६२
सीतलहु हीतल ।१२।२६ हित तें कै ।७।२५
सील रूप ।४।१४ सू हेला लीला करि ।६।४८
सुंदरता पय पावक ।३।४४ हेला लीला ललित ।६।१६
सुख दैके सब ।१०।११ है कोइ माई ।८।१४
सुख दें सखीन ।३।२६ है गति मंद ।३।५४
सुख में दुख ।११।२ है तरुनाई ।११।६
सुधि बुद्धि ।८।११ होइ अचंभो ।१४।३३
सुधि भूल गई ।७।६ होइ कहा अब ।७।३६
सुनि समस्तरसकोबिदा ।३।५० होइ भयानक ।१४।२७
सुभग दसा ।८।१७ हो मन मैलो ।३।६६
शुभ संजोग ।१।१८ होहि बीर ।१४।२४
सूल से फूल ।७।२३ होहि रौद्र रस ।१४।२१
सो आक्रामित ।३।५५ हौं सुख पाइ ।३।६४
हौं उनके तनताप ।८।४७