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रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

Rasikapriya: Nayika Bheda, Shringara Rasa evam Saundarya Manovigyan

by महाकवि केशवदास

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DevanagariHindipublished286 pages

Page 283 of 286

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Page 283

प्रतीकानुक्रमणी [L01_page_number] २८७


बायाँ स्तम्भ (Left Column)

दरस रमन ।४।१६
दसन-बसन मांझ ।१४।७
दिनप्रति जहँ ।१।५
दीनो मैं पाइ ।१३।१३
दीन्ही ताहि ।१।२
दीरघ दरीनि बसै ।११।१८
दुखदायक ह्वै ।८।३०
दुरिहै क्यों ।६२।१३
दुर्लभ देवनिहूँ ।१।१६
दूती सों संकेत ।७।२२
दूरि तें देखिवे ।५।१४
देखत उदधिजात ।७।२४
देखत काहू ।६।६
देखतहीं दुति ।८।३
देखतही चि० ।५।२६
देखतही जिहि ।६।५३
देखन को प्रिय ।४।३ सू
देखी है गुपाल ।३।५२
देखै नहीं ।१४।३८
देस काल बुधि ।१०।२६
देहि री काल्हि ।५।३५
दै दधि दीनो ।१६।६
धनु भू धरि ।३।२१ सू
धाइ, जनी ।१२।१
धाई नहीं घर ।५।१५
धीरा बोले ।३।४६
नंदनंदन खेलत ।६।३२
नख-पद-पदवी ।४।१४
नदी बेतवै ।१।३
नयन बयन कछु ।१४।१
नवल-अनंगा ।३।२१
नवलबधू नवजोबना ।३।१७
नवहू रस के ।१।६
नाह लगे मुख ।१३।२


दायाँ स्तम्भ (Right Column)

नाहीं सिखावति ।१३।६
निंदामय बीभत्स ।१४।३०
निपट कपट हर ।४।१८
निर्बेद ग्लाने ।६।१२
नींद भूख दुति ।४।३
नीरहि तौ बिन ।१०।१६
नील निचोल ।७।३८
नृत्य गीत कबिता ।३।५
नेह-भरे लै ।२।१५
नैननि की चतुराई ।७।२८
नैननि के तारनि ।५।२७
नैननि नवावौ ।१२।१६
नैन बैन मन ।८।१०
न्योति कै बुलाई ।५।३४
पंथ न थकत ५।२०
पति को अति ।३।६३
परकीया द्वै भांति ।३।६८
पल ही पल ।८।५१
पहिले तजि आरस ४।५
पहिले सो हिय ।२।७
पहिले हठि ।६।५२
पाइ परै पलिका ।१२।११
पाइ परै मनुहारि ।३।२७
पाइ परेहू तें ।७।१५
पाइ परौं बलि ।८।११
पाग बनी अरु ।१३।१४
पान न खाए ।६।४७
पायन को परिबो ।६।२२
पिय सों प्रगटन ।५।४
पियहि मनावै ।१०।१८
पूरन-प्रेम,प्रताप तें उपजि ।६।१
पूरन-प्रेम-प्रताप तें भूलत ।६।१८
पूरन-प्रेम-प्रभाव ।६।२७
प्यास द्वै रही ।५।३