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रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

Rasikapriya: Nayika Bheda, Shringara Rasa evam Saundarya Manovigyan

by महाकवि केशवदास

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DevanagariHindipublished286 pages

Page 281 of 286

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Page 281

प्रतीकानुक्रमणी २८५
केसव नैननि ।८।१४-सू खेलत बोलत ।६।३६
केसव प्रोषितप्रेयसी ।७।३ खेलत हे हरि ।६।४६
केसव फूलि नचीं ।३।२१ खेल न हाँसी ।८।३६
केसवराइ की सौहैं ।३।७३ खोट तुरो ।१२।१८
केसवराय बुलावत हैं ।१३।१६ गति गजराज ।१४।२५
केसव रूठि रह्यो ।१२।६ गर्व, ब्यसन ।१०।३२
केसव सुधि बुधि ।८।४१ गर्व हर्ष आबेग ।६।१३
केसव सूधे विलोचन ।२।५ गाहत सिंधु ।१६।५
केसौदास कौन बड़ी ।१३।१८ गिरि गिरि उठि ।१४।१४
केसौदास घर घर ।५।१८ गूढ़ अगूढ़ ।८।४३
केसौदास दिनराति ।१०।२२ गूढ़ भाव को ।६।५४
केसौदास नेहदसा ।४।६ गेह की नेह ।१२।२८
केसौदास न्हान ।१६।७ गोप बड़े बड़े ।७।३२
केसौदास बाल ।१४।३४ घननि की घोर ।१०।२७
केसौदास लाख ।१५।६ घेरि घने घन ।१५।७
केसौदास सकल ।८।१८ घेरी जिनि मोहिं ।१२।१४
केसौदास सबिलास ।३।४० घोरि घनो घनसार ।८।२८
केहरी कपोत ।१४।२२ चंचल न हूजै ।३।२३
कैसैं कै मलयै ।८।१५ चंद को सो ।३।३४
कोकनि की कारिका ।१०।२५ चंद चढ़ाइ ।७।३०
कोकिल केकी ।११।१० चंद नहीं बिषकंद ।८.३१
कोपसील कोबिद ।३।८ चंदन बिटप ।७।११
कोमल अमल दल ।१०।८ चंपे की सी ।१४।२०
कोमल कमल ।१२।१३ चकित चित्त ।७।२६ सू
कोमल बिमल मन ।६।२५ चपला न चमकति ।१०।२१
कौन कें न ।११।६ चपला पट मोर ।६।२६
कौनहुँ हेत ।७।७ चहूँ ओर चितवै ।७।२६ सू
कौनहूँ तोष ।१२।२४ चित चोप ।२।६
कौने रसै बिहँसै ।६।४० चितवौ चितबाएँ ।३।६१
कौ लौं पीहौ ।४।१६ चोरि चोरि चित ।५।६
खंजन हैं मतरंजन ।८।२२ चोली को सो ।७।६
खरे उपचार ।८।४६ छवि सों छबीली ।६।२८
खान पान ।११।१२ सू छार-गंध-जुत ।३।६
खारिक खात न ।१४।३६ छुटै न छूटाएँ ।१२।२५