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रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

Rasikapriya: Nayika Bheda, Shringara Rasa evam Saundarya Manovigyan

by महाकवि केशवदास

DevanagariHindipublished286 pages

Page 174 of 286

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Page 174

१२ अष्टम प्रभाव १७७
श्रीकृष्णजू को प्रच्छन्न प्रलाप, यथा ( सवैया )
(३१६) नील निचोल दुराइ कपोल बिलोकति ही करि ओलिक तोही ।
जानि परी हँसि बोलति भीतर भाजि गई अवलोकत मोही ।
बूझिबे की जक लागी है कान्हहि केसव कै रुचि रूप-लिलोही ।
गोरस की सौं बबाकी सौं तोहि कि बार लगी कहि मेरी सौं को ही ३८
शब्दार्थ-नील = नीला । निचोल = वस्त्र में । दुराइ = छिपाकर । ही =
थी । ओलिक = ओट, परदा । जानि परी = मुझे देखकर भाग गई पर ऐसा
जान पड़ा कि भीतर हँसकर कुछ बोल रही थी । बूझिबे की = उसके बारे में
जानने की । जक = धुन । रुचि = इच्छा । रूप-लिलोही = सौंदर्य को लीलने-
वाली, रूपलोभी । कै रुचि० = सौंदर्यदर्शी इच्छा के कारण । गोरस = दूध ।
सौं = शपथ । बार = द्वार । बार० = बतला दे, तुझे मेरी शपथ द्वार से लगी
वह कौन खड़ी थी ? अथवा किवार = किवाड़ ।
वचन- सखी की उक्ति नायिका या सखी से (कृष्ण की बातों को
दोहरा रही है) ।
श्रीकृष्णजू को प्रकाश प्रलाप, यथा-(कबित्त )
(३२०) मोहन मरीचिका सो हास, घनसार को सो
बास, मुख रूप की सी रेखा अवदात हैं।
केसोदास बेनी तौ त्रिबेनी सी बनाई गुही,
जामें मेरे मनोरथ मुनि से अन्हात हैं।
नेह उरझे से नैन देखिबे कौं बिरुझे से,
बिझुकी सी भौंहैं उझके से उरजात हैं।
लोचन कमल चारु तिन पर पाइ देति,
तेरे घर आई आजु कहि कैसी बात हैं। ३६।
शब्दार्थ - मोहन = मोहनेवाली । मरीचिका = किरण । घनसार =
कपूर । बास = सुगंध । रूप = सौन्दर्य । अवदात = उज्ज्वल, निर्मल, स्वच्छ ।
बेनी = (सं० वेणी ) चोटी । नेह उरझे = प्रेम में उलझे हुए । बिरुझे = हठ
करते हुए । विभुकी = किंचित् तनी हुई । उझके० = झाँकते हुए से । उर-
जात = कुच, स्तन ।
भावार्थ - (नायक की उक्ति सखी से) जिस (नायिका) की हँसी
मोहिनी किरण सी (श्वेत) है, सुगंध कपूर सी है और मुख सौन्दर्य की
निर्मल रेखा की भाँति हैं, जिसने अपनी वेणी उज्ज्वल मोती और लाल तागे
३८-करि-किये, करे । ओलिक-पोलिक । कान्हहि-लालहि । लिलोही-
मिलोहीं । ३६-कोसो-केसो । बात-बात की सो-कंसी । लोचन ०-देखी सी
बनाई बिधि कौन की है जाई यह तेरे घर जाई आजु कहि कैसी बात है ।