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रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

Rasaratna Samuchchaya Hindi

by रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री)

Source: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (origin)

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DevanagariHindipublished362 pages

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तृतीयोऽध्यायः। १२१

स्रोतोऽञ्जनं तदन्यच्च पुष्पाञ्जनकमेव च ।
नीलाञ्जनं च तेषां हि स्वरूपमिह वर्ण्यते ॥ १०१ ॥

अञ्जन पांच प्रकार के होते हैं, जैसे १ सौवीराञ्जन, २ रसाञ्जन (रसौंत), ३ स्रोतोऽञ्जन (कालासुरमा), ४ पुष्पाञ्जन (श्वेतसुरमा), ५ नीलाञ्जन (नील सुरमा) ये पांच भेद हैं ॥ १०१ ॥

विमर्श:— आजकल प्रायः बाजारों में असली अञ्जन नहीं मिलते हैं। इसका कारण प्रथम तो हमारा ही है, क्योंकि हम अच्छी प्रकार से परीक्षा नहीं करते हैं और सिर्फ अज्ञ पंसारी के भरोसे ही पर निर्भर रहते हैं। इसका नतीजा (परिणाम) यह निकलता है कि हमारी औषध शास्त्रोक्त फल नहीं करती है। इस लिये हम नीचे सब प्रकार के अञ्जनों के आधुनिक मत से लक्षण तथा गुण आदि लिख देते हैं। इन लक्षणों से उस द्रव्य की परीक्षा अच्छी प्रकार कर लेनी चाहिए तथा विश्वस्त स्थानों से ही मंगवाने चाहिए। शास्त्र में इनके निम्न पांच भेद किये गये हैं।

"सौवीरमञ्जनं प्रोक्तं रसाञ्जनमतः परम् ।
स्रोतोऽञ्जनं तदन्यच्च पुष्पाञ्जनकमेव च ।
नीलाञ्जनञ्च तेषां हि पञ्च भेदाः प्रकीर्तिताः ॥

१ सौवीराञ्जन-स्टिबनाइटिस (Stybnitis)
२ रसाञ्जन (यलो अक्साइड आफ़मर्करी Yellow, oxide of mercury)
३ स्रोतोऽञ्जन (अन्टीमनी सल्फाइड Antimony sulphide या वरनाग सुरमा)
४ पुष्पाञ्जन (जिन्क आक्साइड Zinc oxide)
५ नीलाञ्जन (गेलेना या लेड सल्फाइड Lead sulphide)

सौवीराञ्जन— यह नेत्र के लिये अच्छा है तथा यह अन्टिमनी (Antimony) और गन्धक (Sulphur) का यौगिक है। यह सुरमा बेली आसाम से आता है।

शास्त्र में इसका लक्षण यह है वल्मीकशिखराकारं भङ्गे नीलोत्पलद्युति। सौवीराञ्जनमित्याहुरायुर्वेद विदो जनाः ॥

रसाञ्जन— इसको यलो आकसाइड आफ मर्करी (Yellow oxide of Mercury) कहते हैं। आजकल प्रायः चिकित्सक रसाञ्जन शब्द से

"दार्वीक्वाथसमं क्षीरं पाद पक्त्वा यदा घनम् ।
तदा रसाञ्जनं ख्यातं………………इति ॥

इस भावप्रकाशोक्त लक्षण विधि से बने हुए द्रव्य ही को सर्वत्र ग्रहण करते हैं। किन्तु यह उचित नहीं है। जहां रसनिर्माण की प्रक्रिया हो वहां रसाञ्जन शब्द से "रसगर्भं रसाञ्जनम्, अर्थात् यलो आक्साइड आफ् मर्करी Yellow oxide of Mercury के नाम से जो खनिज आता