रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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उन्होंने अपनी कृतियों में स्पष्ट कहा भी है कि उनकी कृतियाँ वाल्मीकि रामायण को
आधार मानकर चलती हैं। फिर भी, वे जनता के बीच प्रचलित रामकथा की सर्वथा
उपेक्षा नहीं कर सके ।
कहा जाता है कि सन् १३१० ई० में 'कवित्रय' के प्रसिद्ध कवि एर्रना ने
मूल संस्कृत-रामायण का सही अनुवाद तेलुगु-पद्य में लिखा था । खेद है कि वह रचना
आज हमें अप्राप्त है--केवल उसके कुछ एक पद्य तेलुगु के एक लक्षण-ग्रन्थ में हमें
मिलते हैं। एर्रना के पश्चात् सन् १८६० ई० तक किसी और कवि ने वाल्मीकि रामायण
का सही-सही अनुवाद तेलुगु में प्रस्तुत नहीं किया । सन् १८६० ई० में गोपीनाथ वेंकट
कवि ने संस्कृत-रामायण का सही अनुवाद तेलुगु-पद्य में प्रस्तुत किया । उसके पश्चात्
कितने ही कवियों ने अपनी प्रतिभा के अनुसार संस्कृत-रामायण का अनुवाद किया ।
कहने का तात्पर्य यह है कि १८६० ई० तक राम की कथा पर जो काव्य लिखे गये,
उनपर लोक-कथाओ का ही अत्यधिक प्रभाव रहा ।
आज के शुभ समय में, जबकि भारत की विभिन्न संस्कृतियों में आदान-प्रदान का
कार्य प्रारंभ हो गया है, यह अत्यंत हर्ष की बात है कि दक्षिण के एक सुयोग्य तथा
हिन्दी-तेलुगु-भाषाओ के निपुण विद्वान् श्री ए० सी० कामाक्षि राव ने, तेलुगु की अत्यंत
लोकप्रिय द्विपद रामायण का अनुवाद राष्ट्रभाषा हिन्दी के गद्य में किया है, जिससे
वह भारत के सभी साहित्यों तक पहुँच सके ।
तेलुगु की 'रंगनाथ रामायण' अपने इतिवृत्त, भाव, कला एवं शैली के कारण
तीन करोड़ तेलुगु-भाषाभाषियों के हृदय में राम-भक्ति को जागरित करने में सफलता प्राप्त
कर चुकी है । यदि उसका हिन्दी-अनुवाद आसेतुहिमाचल व्याप्त चालीस करोड़
भारतवासियों के हृदयो में राम-भक्ति जागरित करनेवाली प्रबल शक्ति का स्रोत बन सके,
तो आश्चर्य नहीं करना चाहिए। जयहिन्द ।१
ता० ८, शाके १८८२ } विद्यारत्न निडदवोलु वेंकट राव, एम्० ए०
चैत्र, सोमवार } रीडर तथा तेलुगु-विभाग के अध्यक्ष
२८-३-६० ई० } मद्रास-विश्वविद्यालय
१. 'आन्ध्र महाभारत' के तीन प्रसिद्ध कवि नन्नया, तिक्कना और एर्रना 'कवित्रय'
के नाम से विख्यात हैं ।
२ प्रस्तुत परिचय मूल अगरेजी लेख से अनूदित ।