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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

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पृष्ठ 5

परिचय

तेलुगु-साहित्य में राम-कथा को अग्रस्थान प्राप्त हुआ है, और आज तेलुगु में
रामकथा से सबंधित रचनाओ की संख्या लगभग तीन-चार सौ तक है। पुराण, प्रबंध,
द्विपद, शतक, वचन, यक्षगान, दंडक, पद, गीत एवं संकीर्त्तन--मतलब यह कि आज
तलुगु में महाकाव्य जैसे शास्त्रीय रूप से अपढ़ ग्रामीण जनता के द्वारा गाये जानेवाले
लोकगीतो तक में रामकथा उपलब्ध है। साहित्य-रचना के रूप में रामकथा-साहित्य का
प्रारंभ तेरहवीं सदी में हुआ और उस समय से उस साहित्य की उत्तरोत्तर उन्नति
होती गई। इस साहित्य को प्रेरणा देनेवालो में भद्राचलम् में विराजमान श्रीरामचन्द्र
के अनन्यभक्त रामदास तथा अमरगायक भक्त त्यागय्या सर्वश्रेष्ठ हैं।
तेलुगु-साहित्य के सभी युगो में रामकथा विशेष आकर्षण की वस्तु रही है।
आज भी जब तेलुगु-साहित्य में भिन्न-भिन्न प्रवृत्तियां जन्म ले चुकी हैं और जन्म ले
रही हैं, तेलुगु-भाषा के कई प्रसिद्ध आधुनिक कवियों ने रामकथा को शास्त्रीय पद्धति
पर लिखा है और आज भी कुछ कवि इस कथा को लिखने में लगे हैं। यह इस बात
को प्रमाणित करता है कि राम-भक्ति तेलुगु-जनता के हृदय को ही नहीं, बल्कि उनकी
प्रतिभा पर भी अपनी अमिट छाप छोड़ चुकी है। प्राच्य तथा प्रतीच्य विद्वान् रामायण
का अध्ययन आधुनिक ढंग से करने लगे हैं। अतएव आधुनिक विचार एवं सास्कृतिक
परिपार्श्व की दृष्टि से इस महाकाव्य की व्याख्या करना आवश्यक है। चूंकि दक्षिण की
भाषाओ में भी संस्कृत-रामायण की कथा अनुवादों के रूप में अथवा मौलिक रचना के
रूप में आ गई है, हमें विचार करना होगा कि आर्य एवं आर्येतर संस्कृतियो का समन्वय
करने में रामायण का क्या स्थान है और रामायण भारत की सामासिक संस्कृति का
प्रतीक कैसे बनी हुई है आदि।
'रंगनाथ रामायण' एक द्विपद-काव्य है, जो तेलुगु की रामकथा-सबंधी कृतियो
में अत्यंत लोकप्रिय है। उसकी सरल, शुद्ध तथा प्रवाहमयी देशी शैली ने पंडित एवं
पामर दोनो को समान रूप से आकृष्ट किया है। इस कथा के कुछ भाग 'तोलुबोम्म
लाटा' (एक विशेष प्रकार की पुतलियो का नृत्य) जैसी लोक-कला के कार्य क्रमो में
भी गाये जाते हैं और यह इस बात को स्पष्ट करता है कि कवि राम की अमर-कथा
को तेलुगु-हृदय तक पहुँचाने में किस प्रकार सफल हुए हैं।
चूंकि इस कृति का नाम 'रंगनाथ रामायण' है, सहज ही यह भ्रम हो जाता है
कि इसका कवि 'रंगनाथ' नामक कोई व्यक्ति रहा होगा। किन्तु, इस विषय पर