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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 4, कुल 508 में से

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पृष्ठ 4

( ४ )
सम्बन्ध में और कुछ लिखना पिष्टपेषण ही होगा। हम तो कवल इतना ही कहग कि
दक्षिण भारत के प्राचीन एव मूर्धन्य साहित्य की गरिमा एत्र आभा से हिन्दी-साहित्य
के भाण्डार के भरने की दिगा में हमारा यह विनम्र अनुष्ठान नगण्य न समझा जायगा।
इस अवसर पर हम सबमे पहले श्री म० सत्यनारायण को साधुवाद दिये बिना
नही रह सकते कि उन्होंने परिषद् को इस दिशा में अपने विचार और मुझाव देकर
अत्यधिक उत्साहित किया है । प्रारंभ में हमें उनका सहयोग न प्राप्त होता, तो शायद
हम इस ग्रंथ को तना शीघ्र प्रकाश में न ला सकते । साथ ही हम दक्षिण भारत के
गाँव-गाँव में हिन्दी की धूनी रमानेवाले श्रीअवधनन्दनजी के कृपापूर्ण सहयोग और
साहाय्य को शब्दो में वाँधना नही चाहते । इसम रचमात्र भी अत्युक्ति नही कि उनके
प्रयत्न का ही यह परिणाम है कि हम इस अनुवाद को हिन्दी-जगत् के सामने ला सके हैं।
उन्होंने अनुवादक से सारी पाण्डुलिपि प्राप्त कर पढ़ जाने की कृपा की, साथ ही सम्पादन
भी यथासाध्य किया । नि संकोच रूप से हम यह कह सकते हैं कि इस कार्य
में साहित्य के प्रति उनका अदम्य उत्साह और परम पवित्र निष्ठा गौरव एव ईर्ष्या की
वस्तु है । हम श्रीनिडदवोलु वेंकट राव के प्रति अतिशय कृतज्ञ हैं कि उनका ‘परिचय’
हमें इस ग्रंथ के लिए उपलब्ध हो सका । अनुवादक और सम्पादक के साथ-साथ हम
उनका भी आभार स्वीकार करते हैं, जिनका साहाय्य हमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्राप्त
हो सका है ।
आशाहै, सुधी पाठको को रंगनाथ रामायण के अनुशीलन से प्रसन्नता होगी और
वे देख सकेंगे कि वाल्मीकि रामायण एत्र तुलसीदास के रामचरितमानस से यह किन-
किन वातो में एक और किन-किन बातों में भिन्न है, और यह अनुभव करेंगे कि भापा
और वेश-भूषा की भिन्नता होते हुए भी हमारे सम्पूर्ण देग की मूल सस्कृति किस प्रकार
सर्वथा एक, अभिन्न ए अखण्ड है ।
७-२-६१
भुवनेश्वरनाथ मिश्र ‘माधव’
संचालक