रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ७ )
ठेठ तेलुगु--
चेप्पु लोनिरायि चेविलोनि जोरीग,
कटिलोनि नलुसु, फालिमूल्ल,
इटिलोनि पोरु इंतित कादया ॥
(जूतो में पड़ा हुआ ककड, कान में पहुँचा हुआ कीडा, आंख की फिरफिरी, पैरो में
कांटा और घर में झगड़ा--इनकी पीड़ा असहनीय होती है।)
संस्कृतबहुल तेलुगु--
अधरमु गदली गदलक
मधुरमु लघु भाष लुडिगि
मौन व्रतुडौ अधिकार रोग पूरित
बधिरांधक शवमु जूड पापमु सुमती ॥
[अधरो को बिना हिलाये, मधुर भाषा से रहित हो, मौन व्रत धारण करनेवाला
अधिकार-रोग से भरा व्यक्ति बहरे तथा अंधे शव के बराबर है । उसे देखना भी पाप है।
(रेखांकित शब्द संस्कृत के हैं ।) ]
इन दोनो शैलियों का सामंजस्य भाषा के जिस रूप में पाया जाय, जिसमें तेलुगु
का मुहावरा भी और संस्कृत का मधुर एव गभीर शब्द-समूह भी हो, वही तेलुगु अधिक
लोकप्रिय है और वही सुंदर समझी जाती है । रंगनाथ रामायण की भाषा में ऐसी ही
सुंदरता पाई जाती है । इसकी चर्चा यथास्थान आगे की जायगी ।
तेलुगु-साहित्य--महाकवि नन्नया का आंध्र-महाभारत तेलुगु-साहित्य के उपलब्ध
काव्य-ग्रन्थो में सबसे प्राचीन है । इसकी रचना ग्यारहवीं शताब्दी के मध्य में हुई थी।
इस काव्य की प्रौढ भाषा एव उत्कृष्ट कला-कौशल को देखकर विद्वान् यह अनुमान करते हैं
कि यही महाभारत तेलुगु-साहित्य का आदिकाव्य नहीं हो सकता । उनका विचार है
कि किसी भी भाषा के प्रथम साहित्य का रूप इतना विकसित एवं प्रौढ नहीं हो
सकता; शताब्दियों की साहित्य-साधना के परिणाम-स्वरूप ही ऐसी प्रौढ रचना का
प्रणयन संभव है । यह विचार कल्पना-मात्र कहा नहीं जा सकता। सातवीं तथा आठवीं
शताब्दी के जो शिलालेख एवं तांबे के दानपत्र अबतक उपलब्ध हुए, उनमें उत्कृष्ट
काव्य-स्वरूप के नमूने मिलते हैं । अत., यह कहना सत्य से दूर नहीं होगा कि तेलुगु में
साहित्य-रचना का प्रारंभ ईसा की सातवीं शताब्दी में ही हुआ होगा, किन्तु सातवीं से
दसवीं शताब्दी तक का साहित्य हमें आज उपलब्ध नहीं हो सका ।
सन् १०५० ई० से आजतक के तेलुगु-साहित्य के इतिहास को पांच युगो में
विभाजित किया जा सकता है--
१. पुराण-युग (१०५०--१३५० ई०)
२. श्रीनाथ-युग (१३५०--१५०० ई०)
३ प्रबंध-युग (१५००--१६०० ई०)
४ दक्षिणांध्र-युग (१६००--१८७५ ई०)
५. आधुनिक-युग (१८७५ ई० से)