रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ८ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
नामको रतनहौं ॥ “अर्थी दोषं नपश्यतीतिप्रमाणात्” ॥ और अर्थ रामनामको
पुराणादि परिपूर्ण कहे भुक्ति मुक्त्यादि सब वस्तुसों पूरित अथवा सर्वत्र व्याप्त
बखानत हैं सर्वत्र रहत हैं जहां चाहिये तहाँ लीजिये सब स्थानमें मिलत हैं औ जिन-
नको दर्शन कहे षट्शास्त्र तिनकी समझ नहीं है तिनको रामचंद्र दर्शन देतहैं अति मूर्ख
वाल्मीकादि नामहीके जपसों रामचन्द्रको दर्शन पायो अथवा दर्शन ज्ञान देतहैं
नेति नेति कहे नाइति नाइति कि संपूर्णार्थ इनहीं से कहे की वाल्मीकि से हीन
गणिका यमनादि अनेकन पतितनको राम नामै सिद्धताको प्राप्त कीन्है जाति
कुल विद्याके भेदकी युक्तिको छाँडिकै कछु जाति कुल विद्या परनहीं है जोई
नामोच्चारण करै सोई सिद्धहोइ या प्रकार वेदकहतहैं अथवा प्रथमहीं को अर्थ
जानो जा नामके माहात्म्यको वेद नहीं जानत फेरि नाम कैसोहै रूपसौंदर्य औ
अणिमासिद्धि औ अनेक गुण औ गरिमा सिद्धि औ महिमा सिद्धि औ नाम
कहे यश औ मुक्ति को देतहै तौ सौन्दर्य्यादि जे दृष्टफल हैं ते जहाँ देखिये तहाँ
राम नामहीके प्रभाव सों जानियों औ मुक्ति अदृष्ट फल है ताके अर्थ अंत्य
अवस्था में सब राम नाम कहावतहै यह सनातन रीति चली आवतिहै तासों जानि
यतहै कि मुक्तिका दाता रामनाम छोडि दूसरो नहीं है अथवा रूप जो है वेष
तामें अणिमादि सिद्धि देतहैं जैसा सूक्ष्म रूप चाहै तैसो धरै औ गुणन में गरिमा
सिद्धि देतहैं राम नामके जप प्रभावते सबगुण विद्यादि गरू होतहैं औ भक्तिमें
महिमा सिद्धि बडाई देतहै जो रामनाम जपतहै सो बडो भक्त कहावत है औ
नाममें मुक्तिको देत है अर्थ राम भक्तन प्राणिन की मुक्ति जीवन में सब नाम
गणतहैं अथवा नाम यश औ मुक्तिको देतहै सो यह कहे ऐसो प्रभाव जानिकै
केशवदास जो है सो पुनरुक्ति भय छाँडिकै अनुदिन रामनामको रटत है या
ग्रंथमें रामनाम वस्तु है ताका निर्देश कथनमात्र है तासों वस्तु निर्देशात्मक
मंगलहै ॥ ३ ॥
मू०-सुगीतछंद ॥ सनाढ्य जाति गुनाढ्य हैं जग सिद्ध
शुद्धस्वभाव। कृष्णदत्त प्रसिद्ध हैं महिमिश्र पंडितराव ॥ गणे-
शसो सुत पाइयो बुधकाशिनाथअगाध। अशेषशास्त्र विचा-
रिकै जिनजानियो मतसाध ॥ ४ ॥ दोहा ॥ उपज्यो त्यहि
कुल मंदमति, शठकवि केशवदास ॥ रामचन्द्रकी चन्द्रिका,