रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)
Raghuvamsham of Kalidasa Hindi
by महाकवि कालिदास
Source: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (origin)
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हुए। अनन्तर रामचन्द्र जी, भरत एवं लक्ष्मण के साथ शोभित पताकायुक्त इच्छानुगामी पुष्पक विमान पर वैसे ही आरूढ़ हुए जैसे बुध एवं वृहस्पति के संगति से दर्शनीय तारापति चन्द्रमा रात में चञ्चल बिजली वाले मेघ पर आरूढ़ होते हैं। विमान पर ही भरत जी ने प्रलयकाल में आदि वराह द्वारा उद्धृत पृथ्वी के समान श्रीराम द्वारा रावण के सङ्कट से उद्धृत सीता जी की पादवन्दना की। रावण की प्रणय प्रार्थना को ठुकराने से परम पवित्र एवं वन्दनीय पतिव्रता सीता जी का चरणयुगल तथा भ्राता राम के अनुसरण से जटायुक्तभरत जी का मस्तक ये दोनों मिलकर एक दूसरे को परम पवित्र करनेवाले हुए। बाद श्रीराम की शोभायात्रा आरम्भ हुई।
श्रीराम ने जिसके आगे-आगे अयोध्या के प्रजाजन चल रहे थे, ऐसे मन्दगति वाले पुष्पक विमान से आधा कोस जाकर शत्रुघ्न द्वारा सजाये गये तम्बू आदि से युक्त अयोध्या के सुन्दर उपवनों में सपरिवार निवास किया।
चतुर्दश सर्ग
अयोध्या के उपवन में विश्राम करने के बाद राम और लक्ष्मण ने आश्रय वृक्ष के भग्न हो जाने पर मुरझायी हुई दो लताओं के समान अपने पति राजा दशरथ के स्वर्गवास से शोचनीय अवस्था को प्राप्त दोनों माताओं-कौशल्या तथा सुमित्रा को एक ही साथ देखा। क्रम के अनुसार प्रणाम करनेवाले उन दोनों पुत्रों को दोनों माताओं ने आंसुओं से भरी आंखों से साफ-साफ नहीं देख पाया, किन्तु केवल पुत्रस्पर्श के सुख के अनुभव से जान लिया। दोनों माताओं ने आनन्दजन्य शीतल आंसू एवं शोकजन्य गर्म आंसू को पोंछकर दूर कर दिया। बाद उन्होंने राम एवं लक्ष्मण की देह को राक्षसों के प्रहार से हुए पुराने घावों को नये के समान दया से स्पर्श करती हुई क्षत्रियाणियों को अभीष्ट वीरमाता कहलाना अच्छा नहीं समझा। बाद में सीताजी ने पतिदेव को कष्ट देनेवाली, शुभ लक्षणों से रहित 'मैं सीता हूँ' इस प्रकार कहकर उन दोनों के चरणों पर गिरकर समान रूप से अभिवादन किया। इसपर उन्होंने कहा—कल्याणी ! उठो, लक्ष्मण के साथ तुम्हारे पति राम ने तुम्हारे पवित्र चरित्र से ही इस कठोर कष्ट को पार किया।
इसके बाद बड़े समारोह के साथ वृद्ध मन्त्रियों ने गङ्गा आदि पवित्र तीर्थों से लाये गये जलों से श्रीराम का राज्याभिषेक किया जिससे उनकी और शोभा