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सर्वकोश
परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary

भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished320 पृष्ठ

पृष्ठ 13, कुल 320 में से

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पृष्ठ 13

( ३ )
अन्ततः पुनः इस तथ्य का उल्लेख करते हुए मैं अपनी प्रस्तावना का
उपसंहार करता हूँ कि 'पद्मभूषण' आचार्य श्री विद्यानिवास मिश्र एवं
स्वतन्त्रता-संग्राम-सेनानी आचार्य श्री परमहंस मिश्र ने अपनी श्रीविद्या-साधना
की शक्ति से इस दुरूह ग्रन्थ का हिन्दी 'नीरक्षीरविवेक' भाष्य लिखकर सम्पूर्ण
उत्तर-भारत से विलुप्त हो रहे इस ग्रन्थ का उद्धार करते हुए हिन्दीभाषी जगत्
को एक अनुपम साधना-मार्ग दिखाया है, जिससे भगवान् श्रीपरशुराम द्वारा
आविष्कृत श्रीविद्या-साधना में जिज्ञासु निष्णात हो सकें एवं अपने शिष्यों-प्रशिष्यों
को भी उस मार्ग में प्रेरित एवं प्रवर्तित कर सकें। एतदर्थ इन मिश्रद्वयी विभूतियों
के प्रति पुनः अपनी आदराञ्जलि समर्पित करता हूँ।
इस ग्रन्थ के शीघ्र एवं हृदयावर्जक प्रकाशन करने वाले प्रकाशन-
संस्थान के निदेशक डॉ. हरिश्चन्द्र मणि त्रिपाठी को हार्दिक आशीर्वाद प्रदान
करता हूँ एवं प्रकाशन-सहायक श्री कन्हई सिंह कुशवाहा, ईक्ष्यकर्म-प्रवीण
डॉ. हरिवंश कुमार पाण्डेय तथा डॉ. ददन उपाध्याय, श्री अशोक कुमार
शुक्ल एवं श्री अतुल कुमार भाटिया का मङ्गलाभिशंसन करता हूँ। इस ग्रन्थ
के मुद्रक श्रीजी-कम्प्यूटर-प्रिन्टर्स के संचालक श्री अनूप कुमार नागर हमारे
आशीर्वाद के विशेषाधिकारी हैं, जिन्होंने इस ग्रन्थ की प्रकृति के अनुसार इसके
आवरण-पृष्ठ आदि का भी संयोजन एवं मुद्रण किया है।
अन्त में मैं इस ग्रन्थ को सान्नपूर्णा महाशिव भगवान् विश्वेश्वर के कर-
कमलों में समर्पित करते हुए यह प्रार्थना करता हूँ कि श्रीविद्या-उपासना के
आचार्यों एवं उनके शिष्यों तथा भक्तों के लिए यह ग्रन्थ परम श्रेयस्कर हो।

राममूर्ति शर्मा (हस्ताक्षर)
वाराणसी राममूर्ति शर्मा
श्रावणी-पूर्णिमा, वि.सं. २०५७ कुलपति
( १५.८.२००० खैस्ताब्द ) सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय