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सर्वकोश
पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

Panchadashi by Swami Vidyaranya

स्वामी विद्यारण्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ

पृष्ठ 533, कुल 726 में से

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पृष्ठ 533

ब्रह्मानन्दे अद्वैतानन्दप्रकरणम् ५११
ठीक इसी प्रकार इस संसाररचना का हाल है [विचार
कर देखें तो कहीं भी इसकी श्रृंखला नहीं जुड़ती। खोदते खोदते
रेत की दीवार की तरह, विचार करते करते ही यह तितर बितर
हो जाती है] परन्तु जिनके चित्त को विचार करना नहीं आता
बालकों की कहानी की तरह उनके लिए ही यह संसाररचना
सच्ची हो जाती है।
इत्यादिभिरुपाख्यानैर्मायाशक्तेश्च विस्तरम् ।
वसिष्ठः कथयामास सैव शक्तिर्निरूप्यते ॥२८॥
इत्यादि उपाख्यानों के द्वारा मायाशक्ति का विस्तृत निरू-
पण वसिष्ठ ने किया है। उसी मायाशक्ति का निरूपण अब
किया जायगा ।
कार्यादाश्रयतश्चैषा भवेच्छक्तिर्विलक्षणा ।
स्फोटाङ्गारौ दृश्यमानौ शक्तिस्तत्रानुमीयते ॥२९॥
यह मायाशक्ति अपने कार्य [जगत्] से और अपने आश्रय
[ब्रह्म] इन दोनों से ही विलक्षण [किंवा विपरीत] स्वभाववाली
होती है। दृष्टान्त में देख लो कि वह्नि की शक्ति का कार्य
'स्फोट' [विदारण] तथा शक्ति का आश्रय 'अङ्गार' तो प्रत्यक्ष
ही दीखा करते हैं। शक्ति का अनुमान तो कार्य को देख कर
ही किया जाता है। [इस कारण वह शक्ति उन दोनों (कार्य
और आश्रय अथवा स्फोट और अंगार) से विलक्षण होती है]
पृथुबुध्नोदराकारो घटः कार्योऽत्र मृत्तिका ।
शब्दादिभिः पञ्चगुणैर्युक्ता शक्तिस्त्वतद्विधा ॥३०॥
मिट्टी की शक्ति के विषय में भी यही बात समझ लो—
मोटे और गोल पेट वाला घट तो मिट्टी की शक्ति का कार्य है।