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सर्वकोश
पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

Panchadashi by Swami Vidyaranya

स्वामी विद्यारण्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ

पृष्ठ 534, कुल 726 में से

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पृष्ठ 534

५१२ पञ्चदशी
उस कार्य का आश्रय मिट्टी तो शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध
नाम के पाँच गुणों वाली है। परन्तु शक्ति तो इन दोनों से ही
विलक्षण होती है [वह न तो घटरूप ही है और न वह मृत्तिका
रूप ही है।]
न पृथ्वादिर्नशब्दादिः शक्तावस्तु यथा तथा।
अत एव ह्यचिन्त्यैषा न निर्वचनमर्हति ॥३१॥
कार्य के धर्म मुटापा आदि, तथा आश्रय के धर्म शब्दादि
कोई भी शक्ति में नहीं पाये जाते। इस कारण वह शक्ति अपने
कार्य तथा अपने आश्रय से विलक्षण होती है। वह तो कुछ
ऐसी ही विलक्षण वस्तु है। कार्य और आश्रय से विलक्षण
होने के कारण ही वह अचिन्त्य है [उसका चिन्तन नहीं किया
जा सकता] भेद अभेद या अचिन्त्यत्वादि किसी भी रूप से
उसका निर्वचन हो ही नहीं सकता।
कार्योत्पत्तेः पुरा शक्तिर्निगूढा मृद्यवस्थिता।
कुलालादिसहायेन विकाराकारतां व्रजेत् ॥३२॥
मिट्टी की शक्ति घटादि कार्य की उत्पत्ति से पहले तो मिट्टी
में छिपी पड़ी रहती है [इस कारण प्रकट नहीं होती] कुलाल
दण्ड चक्र आदि की सहायता जब उस शक्ति को मिल जाती
है तब वह विकार [कार्य] के आकार की हो जाती है।
पृथुत्वादिविकारान्तं स्पर्शादिं चापि मृत्तिकाम्।
एकीकृत्य घटं प्राहुः विचारविकला जनाः ॥३३॥
जो लोग विचारहीन हैं, वे पृथुत्वादिरूपी कार्य को, तथा
शब्दस्पर्शादिरूपी मिट्टी को, अपने अविचार के कारण एक
[वस्तु] बना कर उसे 'घट' कहने लगते हैं।