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पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

Panchadashi by Swami Vidyaranya

by स्वामी विद्यारण्य

Source: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (origin)

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DevanagariSanskritpublished726 pages

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( ग )
उन्होंने जो कि अनन्त बांध अनन्त वार बांध बांध कर मुझे भयचकित कर
डाला है, उन से सुखी जीवन को ढूँढ लेने की जो एक बलवती अभिलाषा
मेरे हृदय में जाग कर खड़ी हो गई है, उसी ने मेरा विवेक का हाथ पकड़
कर, आप अनन्त की ओर आने वाले मार्ग का यात्री बनने के लिए मुझे
विवश कर दिया है। मेरे अनन्त जन्मों के अनुभवों ने अब मेरे लिए
आप के सिवाय सभी मार्गों को बन्द कर डाला है। परन्तु हे अच्युत !
हे अनन्त ! प्रेम के जिस आकर्षण से आप अनन्त में सरपट दौड़ लगाई
जाती है—आप अनन्त में सर्वात्मना समाया जाता है—आप अनन्त में
ऐक्यभाव से घुला जाता है—मुझे शक्ति और वर दीजिए कि मेरे सांख्य-
योग नाम के लड़खड़ाते हुए पैरों में वह प्रेमबल आए और मैं मेरी अन-
न्तता को लूट लेने वालों के समूह में से दौड़ लगाकर बाहर आजाऊँ और
आप के समान ही अनन्तता का निर्विषय आनन्द ले सकूँ। ऐसा यदि
आप समर्थ की कृपा से हो जाय तो मेरी जीवनपहेली का उत्तर मुझे
मालूम हो जाय । फिर तो—धन्योहं धन्योहं धन्यो धन्यः पुनः पुनर्धन्यः