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सर्वकोश
पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

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पृष्ठ 8

२ कुंडलिया
( ३ )
सरबंगी कोउ एक है राखै सब की लाज ॥
राखैं सब की लाज काज वो सब के आवैं ।
अंधा पंगुल लूल सबन को डगर बतावैं ॥
मारि पीटि संसार सभन को राह चलावैं ।
उनकी मागि खाइ भेष सब रोटी पावैं ॥
बड़े बहादुर मर्द भेष का परदा राखैं ।
सुनि कै बचन कठोर संत जन जनि कोऊ भाखैं ॥
पलटू जो कोउ संत है सब हमरे सिरताज ।
सरबंगी कोउ एक है राखै सब की लाज ॥
( ४ )
पर स्वारथ के कारने संत लिया औतार ॥
संत लिया औतार जगत को राह चलावैं ।
भक्ति करें उपदेस ज्ञान दे नाम सुनावैं ॥
प्रीत बढ़ावैं भक्त में धरनी पर डोलैं ।
कितनौ कहै कठोर बचन बे अमृत बोलैं ॥
उनको क्या है चाह सहत हैं दुःख घनेरा ।
जिव तारन के हेतु मुलुक फिरते बहुतेरा ॥
पलटू सतगुरु पाय के दास भया निरवार ।
पर स्वारथ के कारने संत लिया औतार ॥
( ५ )
धुन आनै जो गगन की सो मेरा गुरुदेव ॥
सो मेरा गुरुदेव सेवा मैं करिहौं वा की ।
सब्द में है गलतान१ अवस्था ऐसी जा की ॥
निस दिन दसा अरूढ़ लगै ना भूख पियासा ।
ज्ञान भूमि के बीच चलत है उलटी स्वासा ॥
(१) लोटपोट, मस्त ।