पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपलटू साहिब की बानी भाग—१ ३
तुरिया सेती अतीत सोधि फिर सहज समाधी ।
भजन तेल की धार साधना निर्मल साधी ॥
पलटू तन मन वारिये मिलै जो ऐसा कोउ ।
धुन आनै जो गगन की सो मेरा गुरुदेव ॥
( ६ )
नाव मिली केवट नहीं कैसे उतरै पार ॥
कैसे उतरै पार पथिक बिस्वास न आवै ।
लगै नहीं बैराग यार कैसे कै पावै ॥
मन में धरै न ज्ञान नहीं सतसंगति रहनी ।
बात करै नहिं कान प्रीति बिन जैसे कहनी ॥
बूटी डगमगी नाहिं संत को बचन न मानै ।
मूरख तजै बिबेक चतुराई अपनी आनै ॥
पलटू सतगुरु सब्द का तनिक न करै बिचार ।
नाव मिली केवट नहीं कैसे उतरै पार ॥
( ७ )
धुबिया फिर मर जायगा चादर लीजै धोय ॥
चादर लीजै धोय मैल है बहुत समानी ।
चल सतगुरु के घाट भरा जहँ निर्मल पानी ॥
चादर भई पुरानि दिनों दिन बार न कीजै ।
सतसंगत में सौंद ज्ञान का साबुन दीजै ॥
छूटै कलमल दाग नाम का कलप लगावै ।
चलिये चादर ओढ़ि बहुर नहिं भवजल आवै ॥
पलटू ऐसा कीजिये मन नहिं मैला होय ।
धुबिया फिर मर जायगा चादर लीजै धोय ॥
( ८ )
साहिब वही फकीर है जो कोई पहुँचा होय ॥
जो कोई पहुँचा होय नूर का छत्र बिराजै ।