पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
by सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस)
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Read in contextविषय-सूची
पूरा सतगुरु मिलै जो १ काल महासिल २१ लागी गांसी ४२
सतगुरु सिकलीगर मिलै १ ज्यों ज्यों सूखै २१ जियतै मरना ४२
सरबंगी कोउ एक है २ बूड़ी जात जहाज २२ परिवरता को ४२
परस्वारथ के कारने २ एक भक्ति मैं २२ सोई सती सराहिये ४३
धुन आनै जो २ संत न चाहै २३ हरि को दास ४३
नाव मिली केवट ३ ऐसी भक्ति २३ अपनी ओर ४४
धुबिया फिर मर ३ मेरे तन तन लग २४ काजर दिहे से ४४
साहिब वहीं फकीर ३ पिय को खोजन २४ जाकी जैसी ४४
रैयत कौन कहावै ४ मगन भई मेरी २४ टेढ़ सोझ ४५
जग खीजै तो ४ आठ पहर निरखत २५ फूली है यह ४५
नाम नाम सब ५ अम्मा मेरा दिल २५ गुरु की भक्ति ४६
लहना है सतनाम ५ सीस उतारै हाथ २५ पलटू जो सिर ४६
मीठ बहुत सतनाम ५ भूली जग को २६ राम कृस्न ४६
संत सनेही नाम ६ फनि से मनि २६ समुझावै सो ४७
दीपक बारा ६ प्रेम बान जा २७ तुझे पराई ४७
नाम के रे परताप ७ अपने पिय की २७ बहता पानी ४८
देखो नाम ताप ७ सतगुरु सब्द के २७ जिन जिन पाया ४८
हाथी घोड़ा खाक ७ की तौ इक २८ बीज बासना ४८
हाथ जोरि ८ यह तो घर है २८ तो कहँ कोऊ कछु ४९
अदल होइ ८ आसिक का घर २८ इहाँ उहाँ कुछ है ४९
देत लेत हैं ८ जहां तनिक जल २८ मन को मौज ५०
बड़ा होय तेहि ९ जो मैं हारौं २९ जो साहिब का ५०
सीतल चन्दन ९ लगन महूरत ३० जीव जाय तो ५१
संत बराबर १० मोर राम मैं ३० खोजत हीरा को ५१
राम समीपी १० मगन आपने ३० मूरख को ५१
संत सासना १० जो कोउ चाहै ३१ तीन लोक पेरागया ५२
संतन के सिर ११ बैरागिनी भूली ३१ लोक लाज कुल ५२
तीन लोक से ११ मलया के ३२ तन मन लज्जा ५२
फाका जिकर १२ पारस के परसंग ३२ लोक लाज नहिं ५३
कबही फाका १२ फिर फिर नहीं ३२ जेहि सुमिरे गनिका ५३
साध महातम १२ जंगल जंगल मैं ३३ ज्यों ज्यों भीजैं ५४
हरि हरिजन १३ बिन खाये चित ३३ वे बोलैं में ५४
हरि अपनो १३ जो जो गा ३३ जौ लगि लागै ५४
काम क्रोध जिन १४ पलटू मेरी बानि ३४ दुइ पासाही ५५
ना काहू से १४ सतगुरु सब को ३४ चोर मूँसि ५५
पिसना पीसै राँड़ १४ सबद छुड़ावै ३५ पलटू ऐसे दास को ५६
पार दुख कारन १५ सुरत सब्द ३५ बूझि समुझि ले ५६
बिस्वा किये १५ जोग जुगत आसन ३५ पलटू नीच से ऊंच ५६
हवा हिरिस १६ कमठ दृष्टि ३६ हस्ती बिनु मारे मरै ५७
जौ लगि फाटै १६ जैसे कामिनी ३६ स्वांती कौ जल ५७
क्या सोवै तू १६ साहिब साहिब क्या ३७ भक्ति बीज ५८
खेलु सिताबी १७ दिल में आवै ३७ पलटू सरबसदीजिए ५८
ते क्यों गफलत १७ खोजत खोजत ३७ खवा टूटै खवा फाटै ४८
गरमै गरमै १८ नजर मँहै ३८ परदा अंदर का टरै ५९
सुर नर मुनि १८ पहिले दासातन ३८ समुझाये से क्या ५९
चोला भया १८ तुरत पदम-पद ३९ ज्ञान समाधि जा ६०
धुआं का धौरेहरा १९ खाविंद कब ३९ समुझे को ६०
यही दिदारी दार १९ संत चढ़े मैदान ४० अपनी अपनी करनी ६०
आग लगी लंका १९ बाना बांधे लड़ि ४० सरबंगी जो ६१