मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)
Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)
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मुद्राराक्षस-
समय ही चाणक्य के जी में अनेक सन्देह और विकल्प
उत्पन्न कराया। हा फिर ?
विराधगुप्त ।—फिर उस दुष्ट चाणक्य ने बुला कर सब को
सहेज दिया कि आज आधी रात को प्रवेश होगा, और
५ उसी समय पर्व्वतेश्वर के भाई वैरोधक और चन्द्रगुप्त
को एक आसन पर बिठा कर पृथ्वी का आधा २ भाग
कर दिया।
राक्षस ।—क्यों पर्व्वतेश्वर के भाई वरोधक को आधा राज
मिला, यह पहिले ही उसने सुना दिया ?
१० विराधगुप्त ।—हा, तो इससे क्या हुआ ?
राक्षस ।—(आप ही आप) निश्चय यह ब्राह्मण बडा धूर्त्त है, कि
इस ने उस सीधे तपस्वी से इधर-उधर की चार बात
बना कर पर्व्वतेश्वर के मारने के अपयश निवारण के हेतु
यह उपाय सोचा (प्रकाश) अच्छा कहो—तब ?
१५ विराधगुप्त ।—तब यह तो उसने पहले ही प्रकाश कर दिया
था कि आज रात को गृह प्रवेश होगा, फिर उसने वैरो
धक को अभिषेक कराया और बडे बड़े बहुमूल्य स्वच्छ
मोतियों का उसको कवच पहिराया और अनेक रत्नों
से जड़ा सुन्दर मुकुट उसके सिर पर रक्खा और गले
२० में अनेक सुगन्ध के फूलों की माला पहिराई, जिससे वह
एक ऐसे बडे राजा की भांति हो गया कि जिन लोगों ने
उसे सर्व्वदा देखा है वे भी न पहिचान सकें, फिर उस
दुष्ट चाणक्य की आज्ञा से लोगों ने चन्द्रगुप्त की चन्द्र
लेखा नाम की हथिनी पर बिठा कर बहुत से मनुष्य
२५ साथ करके बडी शीघ्रता से नन्द मन्दिर में उसका प्रवेश
कराया। जब वैरोधक मन्दिर में घुसने लगा तब आप
का भेजा दारुवर्म्म बढ़ई उसको चन्द्रगुप्त समझ कर उस