मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)
Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)
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Read in contextद्वितीय अङ्क। ६१
के ऊपर गिराने को अपनी कल की बनी तोरन ले कर सावधान हो बैठा। इसके पीछे चन्द्रगुप्त के अनुयायी राजा सब बाहर खड़े रह गये और जिस बर्बर को आप ने चन्द्रगुप्त के मारने के हेतु भेजा था वह भी अपनी सोने की छड़ी की गुप्ती जिसमे एक छोटी कृपाण थी लेकर वहा खड़ा हो गया।
**राक्षस।—**दोनों ने बे ठिकाने काम किया, हा फिर ?
**विराधगुप्त।—**तब उस हथिनो को मार कर बढ़ाया और उस के दौड़ चलने से कल की तोरण का लक्ष, जो चन्द्रगुप्त के धोखे वैरोधक पर किया गया था, चूक गया १० और वहा बर्बर जो चन्द्रगुप्त का आसरा देखता था, वह बचार। उसी कल की तोरन से मारा गया। जब दारुवर्म्मा ने देखा कि लक्ष तो चूक गए, अब मारे जायहीगे तो उस ने उस कल के लोहे की कील से उस ऊंचे तोरन के स्थान ही पर से चन्द्रगुप्त के धोखे तपस्वी १५ वैरोधक को हथिनो ही पर मार डाला।
**राक्षस।—**हाय ! दोनों बात कैसे दुःख की हुई कि चन्द्रगुप्त तो काल से बच गया और दोनों बिचारे बर्बर और वैरोधक मारे गए; (आप ही आप) दैव ने इन दोन के नहो मारा हम लोगों को मारा ।। (प्रकाश) और वह २० दारुवर्म्म बढ़ई क्या हुआ ?
**विराधगुप्त।—**उस को वैरोधक के साथ के मनुष्यों ने मार डाला।
**राक्षस।—**हाय ! बड़ा दुःख हुआ ! हाय ! प्यारे दारुवर्म्म का हम लोगों से वियोग हो गया। अच्छा ! उस वैद्य २५ अभयदत्त ने क्या किया ?
**विराधगुप्त।—**महाराज ! सब कुछ किया।