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मत्तविलास प्रहसनम् (पल्लव नरेश महेन्द्रविक्रमवर्मा - कांचीपुरम सामाजिक व्यंग्य संस्कृत-हिन्दी सटीक)

मत्तविलास प्रहसनम् (पल्लव नरेश महेन्द्रविक्रमवर्मा - कांचीपुरम सामाजिक व्यंग्य संस्कृत-हिन्दी सटीक)

Mattavilasa Prahasana of Mahendravarman I

by पल्लव सम्राट् महेन्द्रविक्रमवर्मा (व्याख्या: रानी मजूमदार)

DevanagariHindipublished100 pages

Page 31 of 100

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Page 31

भूमिका १८
शाक्यभिक्षु नागसेन भिक्षापात्र में धनदास सेठ के घर से मत्स्य-मांस
युक्त भिक्षा लाता है। उस समय वह कहता है कि बुद्ध ने जब प्रासादों में
रहना, गद्देदार पलँगों पर सोना, पञ्चगन्धयुक्त पान खाना, महीन वस्त्र
पहनना आदि का विधान किया है—तो स्त्री समागम और मद्यपान का
नियम भी अवश्य बनाया होगा। परन्तु वृद्ध बौद्धों ने युवकों के प्रति
ईर्ष्या के कारण उनसे सम्बन्धित मूल ग्रन्थों को अवश्य ही छिपा दिया
होगा—
'अहो अवस्सं एदेहि दुट्ठबुद्धत्थविरेहि णिरुच्छाएहि अम्हाणं तरुणजणाणं
मच्छरेण पिडअपउत्थएसु इत्थिआसुरावाणविहाणाणि परामिट्ठाणित्ति
तक्केमि। कहि णु हु अविणट्ठ मूलपाठं समासादएं।' [अवश्यमेतै-
र्दुष्ट बुद्धस्थविरैर्निरुत्साहैरस्माकं तरुणजनानां मत्सरेण पिटकपुस्तकेषु स्त्री-
सुरापानविधानानि परामृष्टानीति तर्कयामि। कुतो नु खल्वविनष्ट-
मूलपाठं समासादयेयम् । ]
वस्त्र के भीतर अपने भिक्षा पात्र को छिपाकर ले जाते हुए शाक्य-
भिक्षु को कपाली और देवसोमा उसके पात्र को अपना समझकर पकड़ लेते
हैं। तब भिक्षु कहता है कि 'अरे कापालिकोपासक ! नहीं-नहीं ऐसी बात
नहीं है।' अर्थात् वह पात्र कपाली का नहीं है, दूसरी ओर देवसोमा को देखकर
मन ही मन कहता है—
'अहो ललिअरूवा उवासिआ।' [ अहो ललितरूपा उपासिका । ]
कपाली और शाक्यभिक्षु का कलह भी हास्य रस को ही उत्पन्न
करता है। भिक्षापात्र लेने के लिए जब कपाली शाक्यभिक्षु नागसेन के
चीवर का कोना पकड़कर खींचता है तो वह चिल्लाता है—'णमो बुद्धाय ।'
इस पर कपाली कहता है कि फिर तो 'नमः खरपटाय' ऐसा कहना चाहिए
या बुद्ध तो खरपट से भी बढ़कर चोर हैं क्योंकि उन्होंने वेदान्तों और
'महाभारत' से ही तत्त्वों को चुराकर अपने सिद्धान्तों की स्थापना की है।
वेदान्तेभ्यो गृहीत्वार्थान् यो महाभारतादपि ।
विप्राणां मिषतामेव कृतवान् कोशसञ्चयम् ॥
कपाली के इस कथन में श्लेष भी हास्य रस का कारण है। यहाँ 'अर्थ'
शब्द एक ओर वेदान्त के तत्त्वों की ओर संकेत करता है तो दूसरी ओर
'धन' की ओर।