मनहिं निरंजन सबै नचाए
Manhin Niranjan Sabai Nachaye
by सतगुरु मधु परमहंस जी
Source: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (origin)
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Read in contextजलते हैं धोल उड़ते धुवें धार शरीरे ।
चल हंस अचल मोलिदो मावाय हमारे ॥
कह रहे हैं कि यहाँ सब पर मौत का साया मण्डरा रहा है। काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि की आग लगी हुई है, जिसमें सारा संसार जल रहा है। इसलिए इस जलते हुए संसार को छोड़ और हमारे देश में चल।
यह पूरी दुनिया मन की है। मन इस संसार का राजा है,
इसलिए उसी की हुकूमत चल रही है।
जिसकी हुकूमत होती है, उसी का राज होता है, उसी का हुकूम चलता है। देखते हैं कि दुनिया में काल-पुरुष की हुकूमत चल रही है क्या? थोड़ा चिंतन करें तो लगेगा कि चल रही है। जिस भी पार्टी की सत्ता होती है, उसी का हुकूम चलता है। कैबिनेट में बड़े मनिस्टर होते हैं। बिजली के महकमें के लिए अलग मंत्री है, रक्षा के लिए अलग मंत्री है। लगता है कि पूरी हुकूमत चला रहे हैं। क्या इस तरह मन की हुकूमत हमारे अन्दर चल रही है? लग रहा है कि हम सबके अन्दर एक ऐसी सत्ता की हुकूमत चल रही है, जो हमेशा हमारे विरुद्ध चल रही है।
स्कूलों में सरकार की हुकूमत है। वो चाहें तो स्कूल 7 बजे खुलेंगे, वो चाहें तो 8 बजे खुलेंगे। इस तरह दुनिया में निरंजन की हुकूमत चल रही है। वो कैसे कर रहा है हुकूमत?
मनहिं निरंजन सब पर छाए ॥
उसकी ताकत है कि उसके हर आदेश का पालन होता है। आखिर कुछ जान सकते हैं कि कैसे चलता है? वो हरेक चीज़ करवा सकता है। कैसे? जैसे सी.एम. का शासन चल रहा है। मन की हुकूमत कैसे चलती है? यह ब्रेन को संदेश देता है। जितने भी मिनीस्टर हैं, सी.एम. के अधीन हैं। इस तरह मन के भी बड़े मिनीस्टर हैं। मन ने कहा कि फ़लाने को तमाचा मारो। यह आज्ञा कैसे पालन हुई? मन ने यह चीज़ बुद्धि को बताई। बुद्धि क्या है? यह बुद्धि भी मन है। उसने विचार किया कि गाली बकी थी इसने। बुद्धि ने क्रोध को बुलाया, कहा कि सुनो, यह