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मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

by सतगुरु मधु परमहंस जी

Source: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (origin)

Devanagarihipublished120 pages

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चुके हैं। सब भौचक्के रह गये—“यह क्या कह रहे हो!” “हाँ! मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूँ। अभी-अभी खबर मिली है कि कुछ गधों ने जल में डूब कर जल-समाधि ले ली है। लेकिन अभी तक उन्हें समाधि का खिताब नहीं मिल पाया है। अभी इस पर बहस चल रही है कि यह सब कैसे हुआ।”

समस्या को सुलझाते हुए उसने फिर कहा—“पहले लोग ध्यान में खोकर समाधि लगाया करते थे। ऐसा करने से उनकी आयु में वृद्धि होती थी और वे अधिक-से-अधिक प्रभु का भजन कर पाते थे। आजकल यह काम थोड़ा मुश्किल हो गया है। समाधि का लगना आसान नहीं रहा। ऐसे में कुछ लोग विचार करके आसान-सी और बड़ी समाधि ले रहे हैं। शायद गधों ने भी किसी को ऐसी समाधि लेते देखा होगा। आखिर गधे तो ठहरे! बस लगा ली समाधि।”

समाधि का लेना कोई मज़ाक नहीं है। बड़ा ही कठिन कार्य है, यह। कोई अग्नि समाधि ले लेता है तो कोई जल-समाधि। अभी हमारा समाज इस दिशा में थोड़ा पिछड़ा हुआ है..... ज्यादा तरक्की नहीं हुई। अभी तक ट्रेन-समाधि, ट्रक-समाधि, आदि समाधियों वाले साधक उत्पन्न नहीं हुए। सुनने में आता है कि किसी ज़माने में जब लोग जिन्दगी से तंग आ जाते थे तो वे आत्म-हत्या कर लेते थे। आज लोग पहले से अधिक तंग हैं, पर आज पहले वाली कायरता लोगों में नहीं रही। पहले लोग खुदकुशी करके अपनी कायरता का परिचय देते थे। कोई जल में डूबकर मर जाता था तो कोई तेल छिड़क कर अपने को आग से खत्म कर देता था। आज आत्महत्या का स्थान समाधि ने ले लिया है। कोई जल-समाधि ले रहा है तो कोई अग्नि-समाधि। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि कई लोग ज़हर खाकर तो कई लोग ट्रेन के नीचे आकर भी आत्महत्या कर रहे हैं, पर उन्हें समाधि का खिताब नहीं मिल पा रहा। शोधकर्ता बताते हैं कि ये खिताब कुछ खास लोगों के लिए ही सुरक्षित होते हैं। आम जनता को ये खिताब कतई नहीं दिये जा सकते; इसलिए उन्हें बड़ी देर से इंतजार है कि कब कोई बड़ा खास आदमी ज़हर-