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सर्वकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 260, कुल 3237 में से

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एकत्रिशोऽध्यायः

कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध तथा अश्वत्थामाके द्वारा राजा नीलका वध

धृतराष्ट्र उवाच

तेष्वनीकेषु भग्नेषु पाण्डुपुत्रेण संजय ।
चलितानां द्रुतानां च कथमासीन्मनो हि वः ॥ १ ॥
**धृतराष्ट्रने पूछा—**संजय! पाण्डुपुत्र अर्जुनके द्वारा पराजित हो जब सारी सेनाएँ भाग खड़ी हुईं, उस समय विचलित हो पलायन करते हुए तुमलोगोंके मनकी कैसी अवस्था हो रही थी? ॥ १ ॥
अनीकानां प्रभग्नानामवस्थानमपश्यताम् ।
दुष्करं प्रतिसंधानं तन्ममाचक्ष्व संजय ॥ २ ॥
भागती हुई सेनाओंको जब अपने ठहरनेके लिये कोई स्थान नहीं दिखायी देता हो, उस समय उन सबको संगठित करके एक स्थानपर ले आना बड़ा कठिन काम होता है। अतः संजय! तुम मुझे वह सब समाचार ठीक-ठीक बताओ ॥ २ ॥

संजय उवाच

तथापि तव पुत्रस्य प्रियकामा विशाम्पते ।
यशः प्रवीरा लोकेषु रक्षन्तो द्रोणमन्वयुः ॥ ३ ॥
**संजयने कहा—**प्रजानाथ! यद्यपि सेनाओंमें भगदड़ पड़ गयी थी, तथापि बहुत-से विश्वविख्यात वीरोंने आपके पुत्रका प्रिय करनेकी इच्छा रखकर अपने यशकी रक्षा करते हुए उस समय द्रोणाचार्यका साथ दिया ॥ ३ ॥
समुद्यतेषु चास्त्रेषु सम्प्राप्ते च युधिष्ठिरे ।
अकुर्वन्नार्यकर्माणि भैरवे सत्यभीतवत् ॥ ४ ॥
अन्तरं भीमसेनस्य प्रापतन्नमितौजसः ।
सात्यकेश्चैव वीरस्य धृष्टद्युम्नस्य वा विभो ॥ ५ ॥
प्रभो! वह भयंकर संग्राम छिड़ जानेपर समस्त योद्धा निर्भय-से होकर आर्यजनोचित पुरुषार्थ प्रकट करने लगे। जब सब ओरसे हथियार उठे हुए थे और राजा युधिष्ठिर सामने आ पहुँचे थे, उस दशामें भीमसेन, सात्यकि अथवा वीर धृष्टद्युम्नकी असावधानीका लाभ उठाकर अमिततेजस्वी कौरवयोद्धा पाण्डव-सेनापर टूट पड़े ॥ ४-५ ॥
द्रोणं द्रोणमिति क्रूराः पञ्चालाः समचोदयन् ।
मा द्रोणमिति पुत्रास्ते कुरून् सर्वानचोदयन् ॥ ६ ॥