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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 370 of 404

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Page 370

( ३६२ ) माधवनिदान ।
ज्वराद्या व्याधयः सर्वे महतां ये पुरेरिताः ॥
बालदेहेऽपि ते तद्वज्ज्ञेयाः कुशलैः सदा ॥ १६ ॥
क्षुद्ररोगनिदानमें जो अजगल्ली और अहिपूतना कही हैं सो और ज्वरादिक सर्व
रोग जो बडे मनुष्योंके होते हैं अर्थात् जिन रोगोंको पूर्व कहि आये हैं वे सब रोग
बालकोंके देहमें भी होते हैं, ऐसे कुशल वैद्योंको जानना चाहिये ॥
सामान्य ग्रहजुष्टके लक्षण ।
क्षणादुद्विजते बालः क्षणात्त्रस्यति रोदिति ॥ १७ ॥
नखैर्दन्तैर्दारयति धात्रीमात्मानमेव च ।
ऊर्ध्वं निरीक्षते दन्तान् खादेत्कूजति जृम्भते ॥ १८ ॥
भ्रुवौ क्षिपति दंतोष्ठं फेनं वमति चासकृत् ।
क्षामोऽतिनिशि जागर्ति शूनांगो भिन्नविट्स्वरः ॥ १९ ॥
मांसशोणितगन्धिश्च न चाश्नाति यथा पुरा ।
सामान्यग्रहजुष्टानां लक्षणं समुदाहृतम् ॥ २० ॥
कभी क्षणभरमें बालक विह्वल हो जाय कभी क्षणभरमें डरे, रोवे, नख और
दांतोंसे अपने शरीर और माताको खसीटे, ऊपरको देखे, दांतोंको चबावे, किल-
कारी मारे, जंभाई लेय, भ्रुव ( भौंह ) को तिरछी करे, दांतोंसे होठोंको खाय,
बारंबार मुखसे झाग डाले, वह अत्यन्त क्षीण होय, रात्रिमें सोवे नहीं, सूजन
होय, मल पतला होय, स्वर बैठ जाय, उसके देहमें रुधिर मांसकीसी बास आवें
जितना पहिले खाता होय उतना नहीं खाय, ये सामान्य ग्रहव्याप्त बालकके
लक्षण हैं। अब कहते हैं कि, स्कन्दादिक ग्रह पूजाके अर्थ बालकोंको मारे हैं सो
चरकमें लिखा है ॥
स्कन्दग्रहगृहीतबालकके लक्षण ।
एकनेत्रस्य गात्रस्य स्रावः स्पन्दनकंपनम् ।
अर्द्धदृष्ट्या निरीक्षेत वक्रास्यो रक्तगंधिकः ॥ २१ ॥
दंतान् खादति वित्रस्तः स्तन्यं नैवाभिनंदति ।
स्कंदग्रहगृहीतानां रोदनं चालपमेव च ॥ २२ ॥
१ धात्रीमात्रोः प्राक्प्रदिष्टोपचाराच्छौचभ्रंशान्मंगलाचारहीनान् ।
क्लिष्टांस्वांस्तांस्तर्जितांस्ताडितांश्च पूजाहेतोर्हिंस्युरेते कुमारान् ॥
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