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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 369 of 404

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Page 369

भाषाटीकासमेत । ( ३५१ )
पारिगर्भिकके लक्षण ।
मातुः कुमारो गर्भिण्याः स्तनं प्रायः पिबन्नपि ।
कासाग्निसादवमथुतंद्राकार्श्यारुचिभ्रमैः ॥ १० ॥
युज्यते कोष्ठवृद्धया च तमाहुः पारिगर्भिकम् ।
रोगं परिभवाख्यं च दद्यात्तत्राग्निदीपनम् ॥ ११ ॥
बालकके गर्भिणी माताका दूध पीनेसे खांसी, मंदाग्नि, वमन, तन्द्रा, अरुचि,
कृशता और भ्रम ये होवें और उसके पेटकी वृद्धि होय, इस रोगको वैद्यगण
पारिगर्भिक अथवा परिभव कहते हैं । इस रोगमें अग्निदीपनकर्त्ता औषधि बाल-
कको देनी चाहिये ॥
तालुकंटकके लक्षण ।
तालुमांसे कफः क्रुद्धः कुरुते तालुकंटकम् ॥ १२ ॥
तेन तालुप्रदेशस्य निम्नता मूर्ध्नि जायते ।
तालुपातः स्तनद्वेषः कृच्छ्रात्पानं शकृद् द्रवम् ।
तृडक्षिकंठास्यरुजा ग्रीवाधुर्धरता वमिः ॥ १३ ॥
तालुके मांसमें कफ कुपित होकर तालुकंटक रोगको करे, उसके होनेसे तालुके
ऊपरका भाग नीचा हो जाय, तथा भीतरसे बालकका तालुआ बिंधजाय, इसीसे
बालक स्तन (छाती) को नहीं दावे और पीवेभी तो बडे कष्टसे पीवे, पतला मल
होजाय, प्यास लगे, नेत्र कंठ मुख इनमें पीडा होय, लार गिर पडे और जो दूध
पीवे उसे डाल दे ॥
महापद्मविसर्पके लक्षण ।
विसर्पस्तु शिशोः प्राणनाशनो बस्तिशीर्षजः ॥ १४ ॥
पद्मवर्णो महापद्मो रोगो दोषत्रयोद्भवः ।
शंखाभ्यां हृदयं याति हृदयाद्वा गुदं व्रजेत् ॥ १५ ॥
बालकोंके जो मस्तक और वस्ती (मूत्रस्थान) में विसर्प होय है वह बालकका
प्राणनाशक जानना, जो विसर्प कमलके पत्रके समान लाल होय है वह महापद्म
रोग त्रिदोषज है, यह कनपटीमें उत्पन्न होकर हृदय पर्यन्त जाता है अथवा हृदयमें
होकर गुदापर्यन्त जाता है ॥
और विकार जो बालकोंके होते हैं उनको कहते हैं-
क्षुद्ररोगे च कथिते अजगल्ल्यहिपूतने ।

CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA