माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
by माधवकर
Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextभाषाटीकासमेत । ( ३५३ )
बालकके एक नेत्रसे पानी गिरे और अंगमें स्राव ( पसीना ) बहे, एक ओरका अंग
फडके तथा थर थर कांपे, वह बालक आधी दृष्टिसे देखे, मुख टेढा होजाय, रुधिरकीसी
दुर्गंध आवे, वह बालक दाँतोंको चबावै, अंग शिथिल होजाय, स्तनको नहीं पीवे और
थोडा रोवे, ये स्कन्दग्रह लगे बालकके लक्षण हैं। इस जगह स्कन्दग्रह करके शिवजीके
प्रगट करे जो ग्रह हैं उनमेंसे, श्रीशिवपुत्र स्वामिकार्तिकका ग्रहण न करना चाहिये ॥
स्कन्दापस्मारके लक्षण ।
नष्टसंज्ञो वमेत्फेनं संज्ञान्वानतिरोदिति ।
पूयशोणितगन्धित्वं स्कंदापस्मारलक्षणम् ॥ २३ ॥
बालक बेसुधि होय, मुखसे झाग डाले, जब होश हो तब रोवे, उसकी देहमें
रुधिरकीसी दुर्गंधि आवे इन लक्षणों करके स्कन्दापस्मारके लक्षण जानने ॥
शकुनिग्रहके लक्षण ।
स्रस्तांगो भयचकितो विहंगगन्धिः संस्रावव्रणपरिपीडितः समन्तात् ।
स्फोटैश्च प्रचिततनुः सदाहपाकैर्विज्ञेयो भवति शिशुः क्षतः शकुन्या॥
शकुनिग्रहसे पीडित बालकके अंग शिथिल होयँ, भयसे चकित होयँ, उसके
अंगमें पक्षीके अंगके समान बास आवे, घाव होकर उसमेंसे लस बहे, सर्व अंगोंमें
फोडे उत्पन्न होयँ और ये पकें तथा दाह होय ॥
रेवतीग्रहके लक्षण ।
व्रणैः स्फोटैश्चितं गात्रं पंकगंधमसृक्स्रवेत् ।
भिन्नवर्चा ज्वरो दाहो रेवतीग्रहलक्षणम् ॥ २४ ॥
रेवतीग्रहसे पीडित बालकके अंगमें घाव और फोडे होयँ, उनमेंसे रुधिर बहे,
उनमें कीचकीसी बास आवे, दस्त होय, ज्वर होय और अंगमें दाह होय ॥
पूतनाग्रहके लक्षण ।
अतिसारो ज्वरस्तृष्णा तिर्यक्प्रेक्षणरोदनम् ।
नष्टनिद्रस्तथोद्विग्नः स्रस्तः पूतनया शिशुः ॥ २५ ॥
पूतना ग्रहकी पीडासे बालकको दस्त, ज्वर, प्यास होय, टेढी दृष्टिसे देखे, रोवे,
सोवे नहीं, व्याकुल होय, शिथिल होजाय ये लक्षण होते हैं ॥
अंधपूतनाग्रहके लक्षण ।
छर्दिः कासो ज्वरस्तृष्णा वसागंधोऽतिरोदनम् ।
स्तन्यद्वेषोऽतिसारश्चाप्यंधपूतनया भवेत् ॥ २७ ॥
१ तदुक्तं हिरण्याक्षेण—संस्रावदाहपाकाद्यैश्चितः स्फोटैर्भयाऽन्वितः ।
स्रस्तांगो विस्रगंधिः स्याच्छकुन्या पीडितः शिशुः ॥