माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
by माधवकर
Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in context( ३५० ) माधवनिदान ।
आध्मानपृष्ठनमनजठरोन्नमनैरपि ।
बस्तौ गुह्ये च विण्मूत्रसङ्गत्रासदिगीक्षणैः ॥
स्रोतांस्यंगानि संधींश्च पश्येद्यत्नान्मुहुर्मुहुः ॥ ७ ॥
बालकोंके रुदन (रोने) से उसके थोडी वा बहुत पीडा जाननी। यह बालक
जिस ठिकाने वारंवार हाथ लगावे उस ठिकाने और जिस जगह औरके हाथको
न लगाने दे उस ठिकाने उसके पीडा जाननी चाहिये । नेत्रोंके मूँदनेसे मस्तक
पीडा जाने, मलावरोध, वमन, स्तन, (छातीको) चबाना तथा पेटका गूंजना,
पेटका फूलना तथा पेटका उछलना इन लक्षणोंसे बालकके पेटमें पीडा जाननी ।
मलमूत्रके रुकने तथा डरनेसे और सर्वत्र देखनेसे इन लक्षणोंसे उसकी बस्ति (मूत्र-
स्थान) और गुदामें पीडा जाननी, वैद्य बालकके स्रोत (नाक मुख कान आदि
छिद्रों) को, हाथ पैरसे आदिले अवयवों और सन्धियोंको बारम्बार देखे तो रोगका
यथार्थ ज्ञान होय ॥
"द्वन्द्वज और सन्निपातज दूषित दुग्धके रोग ।
द्विलिङ्गं द्वन्द्वजं विद्यात्सर्वलिङ्गं त्रिदोषजे ।
पूर्वोक्त जो वातादिदूषित दुग्धके लक्षण कहे हैं उनमें दोषके लक्षण मिलनेसे
द्वेद्वज रोग जानना और त्रिदोषके लक्षण मिलनेसे सन्निपातका रोग जानना, यह
श्लोक प्रक्षिप्त है माधवाचार्यका नहीं है ॥”
कुकूणकके लक्षण ।
कुकूणकः क्षीरदोषाच्छूनामक्षिवर्त्मनि ।
जायते तेन नेत्रं च कण्डूरं च स्रवेन्मुहुः ॥ ८ ॥
शिशुः कुर्याल्ललाटाक्षिकूटनासाविघर्षणम् ।
शक्तो नार्कप्रभां द्रष्टुं न वर्त्मोन्मीलनक्षमः ॥ ९॥
कुकूणक यह रोग बालकोंके दूधके दोषसे होता है, इस रोगके होनेसे बाल-
कके नेत्रके कोएमें सूजन, नेत्र खुजावे और पानी बहे, नेत्रोंमें कीचड आनेसे वह
ललाट, नेत्र और नाकको रगडे, धूपके सामने देखा न जाय, उसके नेत्र खुले
नहीं, इसको लौकिकमें कोयस्राव कहते हैं, यह रोग बालकोंके ही होता हैं सो
वाग्भटमें लिखा है ॥
१ कुकूणकः शिशोरेव दंतोत्पत्तिनिमित्तजः ।