माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
by माधवकर
Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in context( २७२ ) माधवनिदान ।
जनयंति शरीरेऽस्मिन्दुष्टरक्तेन संगताः ॥
मसूराकृतिसंस्थानाः पिडिकाः स्युर्मसूरिकाः ॥ २ ॥
कडुआ, खट्टा, नोनका, खारी, विरुद्ध भोजन, अध्यशन ( भोजनके ऊपर भोजन ),
दुष्ट अन्न, निष्पाव ( शिंबीबीज उडद् मूँग ) आदि, शाक, विषैले फूल आदिसे
मिला पवन तथा जल, शनैश्चरादि खोटे ग्रहोंका देखना इन सब कारणों करके शरी-
रमें वातादिदोष कुपित होकर दुष्ट रुधिरमें मिलकर मसूरके समान देहमें अनेक
मरोरी उत्पन्न करें, उनको मसूरिका ( माता ) कहते हैं । “ दुष्टरक्तेन संगताः ”
इस पद धरनेसे रुधिरका कटु अम्लादि हेतु करके विशेष कोप दिखाया इसीसे
ग्रन्थोन्तरोंमें लिखा भी है ॥
मसूरिकाके पूर्वरूप ।
तासां पूर्वं ज्वरः कण्डूर्गात्रभङ्गोऽरुचिर्भ्रमः ।
त्वचि शोफः सवैवर्ण्यं नेत्ररागस्तथैव च ॥ ३ ॥
तिस माता शीतलाके पूर्व ज्वर होय, खुजली चले, देहमें फूटनी होय, अन्नमें
अरुचि, भ्रम होय, अंगके ऊपरकी त्वचा में सूजन होय तथा वर्ण पलटजाय, नेत्र
लाल होयँ ये शीतलाके पूर्वरूप होते हैं ॥
वातकी मसूरिकाके लक्षण ।
स्फोटाः कृष्णारुणा रूक्षास्तीव्रवेदनाऽन्विताः ।
कठिनाश्चिरपाकाश्च भवन्त्यनिलसम्भवाः ॥ ४ ॥
सन्ध्यस्थिपर्वणां भेदः कासः कम्पोऽरतिः कुमः ।
शोषस्ताल्वोष्ठजिह्वानां तृष्णा चारुचिसंयुता ॥ ५ ॥
वातमसूरिकाके फोडे काले, लाल और रूक्ष होते हैं, उनमें तीव्र पीडा होय'
कठिन होय, शीघ्र पके नहीं, इसके योगसे सन्धि हाड और पर्वोंमें फोडनेकीसी
पीडा, खांसी, कम्प, चित्त स्थिर न हो, बिना परिश्रमके श्रम होय, तालुआ, होठ
और जीभ ये सूखने लगें, प्यास, अरुचि ये लक्षण होते हैं ॥
पित्तकी मसूरिकाके लक्षण ।
रक्ताः पीताः सिताः स्फोटाः सदाहास्तीव्रवेदनाः ।
भवन्त्यचिरपाकाश्च पित्तकोपसमुद्भवाः ॥ ६ ॥
१ पित्तं शोणितसंसृष्टं यदा दूषयति त्वचम् । तदा करोति पिडिकाः सर्वगात्रेषु देहिनाम् ॥
मसूरमुद्गमाषाणां तुल्याः कालोपमा इति । मसूरिकास्तु ता ज्ञेयाः पित्तरक्ताधिका बुधैः ॥ इति ।