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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 289 of 404

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Page 289

भाषाटीकासमेत । (२७१)
जो फोडा बीचमें नीचे होय और ओरपासके ऊंचा होय, कठिन कुछ पका
होय है तथा जिसके योगसे दाह, अंगमें लाली, प्यास, मोह, वमन, मूर्च्छा, पीडा,
ज्वर, प्रलाप, कम्प, तन्द्रा ये लक्षण होते हैं वह सन्निपातका विस्फोटक असाध्य है ॥
रक्तजविस्फोटकके लक्षण ।
रक्ता रक्तसमुत्थाना गुञ्जाफलनिभास्तथा ।
वेदितव्यास्तु रक्तेन पैत्तिकेन च हेतुना ॥
न ते सिद्धिं समायांति सिद्धैर्योगशतैरपि ॥ १० ॥
रुधिरसे प्रगट भया विस्फोटक तांबेके रंगका, गुंजा (चिरमिटी) के समान लाल,
वह रुधिरके दुष्ट होनेसे अथवा पित्तके दुष्ट होनेसे होय है, इसमें सैकडों अनुभव-
कारी औषधके करनेसे साध्य नहीं होय है ॥
साध्यासाध्यविचार ।
एकदोषोत्थितः साध्यः कृच्छ्रसाध्यो द्विदोषजः ।
सर्वरूपान्वितो घोरस्त्वसाध्यो भूर्युपद्रवः ॥ ११ ॥
एक दोषसे प्रगट भया जो विस्फोटक वह साध्य है, द्विदोषका कष्टसाध्य है और
सर्वलक्षणयुक्त होय सो भयंकर तथा जिसमें उपद्रव बहुत होयँ वह विस्फोटक
असाध्य है ॥
विस्फोटकके उपद्रव ।
हिक्का श्वासोऽरुचिस्तृष्णा अङ्गसादो हृदि व्यथा ।
विसर्पज्वरहृल्लासा विस्फोतानामुपद्रवाः ॥ १२ ॥
हिचकी, श्वास, अरुचि, प्यास, अंगग्लानि, हृदयमें पीडा, विसर्परोग, ज्वर,वमन
ये विस्फोटकके उपद्रव जानने ॥
इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषाटीकायां
विस्फोटकनिदानं समाप्तम् ॥
अथ मसूरिकानिदानम् ।
कारण और सम्प्राप्ति ।
कट्वम्ललवणक्षारविरुद्धायशनाशनैः ।
दुष्टनिष्पावशाकाद्यैः प्रदुष्टपवनोदकैः ॥ १ ॥
क्रूरग्रहेक्षणाद्वापि देहे दोषाः समुद्धताः ।