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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 291 of 404

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Page 291

भाषाटीकासमेत। (२७३)
विड्भेदश्चांगमर्दश्च दाहस्तृष्णाऽरुचिस्तथा ।
मुखपाकोऽक्षिपाकश्च ज्वरस्तीक्ष्णः सुदारुणः ॥ ७ ॥
पित्तकी मसूरिकाका मुख पीला, सफेद होय है, उसमें दाह तथा पीडा बहुत
होय और यह शीतला शीघ्र पके, इसके योगसे मल पतला होय, अंग टूटे, दाह,
प्यास, अरुचि, मुखपाक और नेत्रपाक होय, ज्वर तीव्र हो ये लक्षण होयँ हैं ॥
रक्तजमसूरिकाके लक्षण ।
रक्तजायां भवन्त्येते विकाराः पित्तलक्षणाः ॥ ८ ॥
रक्तज मसूरिकामें पित्तज मसूरिकाके लक्षण होते हैं ॥
कफजमसूरिकाके लक्षण ।
कफप्रसेकः स्तैमित्यं शिरोरुग्गात्रगौरवम् ।
हृल्लासः सारुचिर्निद्रा तन्द्रालस्यसमन्विता ॥ ९ ॥
श्वेताः स्निग्धा भृशं स्थूलाः कण्डूरा मंदवेदनाः ।
मसूरिकाः कफोत्थाश्च चिरपाकाः प्रकीर्तिताः ॥ १० ॥
कफकी मसूरिकामें मुखके द्वारा कफका स्राव होय, अंगमें आर्द्रता तथा भारी
पना, मस्तकमें शूल, वमनआनेकीसी इच्छा होय, अरुचि, निद्रा, तन्द्रा, आलस्य
ये होयँ और फोडे सफेद चिकने अत्यन्त मोटे होयँ, इनमें खुजली बहुत चले,
पीडा मन्द होय और वे बहुत दिनमें पकें ॥
त्रिदोषजमसूरिकाके लक्षण ।
नीलाश्चिपिटविस्तीर्णा मध्ये निम्ना महारुजः ।
चिरपाकाः पूतिस्रावाः प्रभूताः सर्वदोषजाः ॥ ११ ॥
त्रिदोषज मसूरिकाके फोडे नीले, चिपटे, लंबे, बीचमें नीचे ऐसे होयँ, उसमें
पीडा अत्यन्त होय तथा वे बहुत दिनमें पकें और उनमेंसे दुर्गन्धयुक्त स्राव होय,
फोडे सर्व दोषके बहुत होय हैं ॥
चर्मपिडिकाके लक्षण ।
कण्ठरोधोऽरुचिस्तन्द्राप्रलापारतिसंयुताः ।
दुश्चिकित्स्याः समुद्दिष्टाः पिडिकाश्चर्मसंज्ञिताः ॥ १२ ॥
जिस फोडेके होनेसे कण्ठ रुक जाय, अरुचि, तन्द्रा, प्रलाप, चैन न पडना यें
लक्षण होते हैं, जिनकी औषधि नहीं हो सके ऐसी चर्मसंज्ञक पिडिका जाननी ॥