कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला
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Read in contextप्रकरण १७८ | # प्रलम्भने भैषज्यमन्त्रप्रयोगः
अध्याय ३ |
(१) मार्जारोष्ट्रवृकवराहश्वाविद्वागुलीनप्तृकाकोलुकानामन्येषां वा निशाचराणां सत्त्वानामेकस्य द्वयोर्बहूनां वा दक्षिणानि वामानि वाक्षीणि गृहीत्वा द्विधा चूर्णं कारयेत् । ततो दक्षिणं वामेन वामं दक्षिणेन समभ्यज्य रात्रौ तमसि च पश्यति ।
(२) एकाम्लकं वराहाक्षि खद्योतः कालशारिबा ।
एतेनाभ्यक्तनयनो रात्रौ रूपाणि पश्यति ॥
(३) त्रिरात्रोपोषितः पुष्ये शस्त्रहतस्य शूलप्रोतस्य वा पुंसः शिरः-कपाले मृत्तिकायां यवानावाप्याविक्षीरेण सेचयेत्, ततो यवविरूढमालामा-बध्य नष्टच्छायारूपश्चरति ।
(४) त्रिरात्रोपोषितः पुष्येण श्वमार्जारोलूकवागुलीनां दक्षिणानि वामानि चाक्षीणि द्विधा चूर्णं कारयेत् । ततो यथास्वमभ्यक्ताक्षो नष्ट-च्छायारूपश्चरति ।
प्रलम्भन योग में औषधि तथा मंत्र का प्रयोग
( १ ) रात में घूमनेवाले : बिल्ली, ऊँट, भेड़िया, सूअर, साही, बागुली, नप्ता, कौआ और उल्लू अथवा रात्रि में विचरण करने वाले इसी प्रकार के दूसरे प्राणी, इनमें से एक, दो या अनेकों की दोनों आँखों को निकाल कर उनका अलग-अलग चूर्ण बनाया जाय । तदनन्तर बाईं आँखों से बना चूर्ण दाईं आँख पर और दाईं आँख से बना चूर्ण बाईं आँख पर अञ्जन कर देने से मनुष्य भी रात के समय घोर अंधकार में प्रत्येक वस्तु को देख सकता है ।
( २ ) एक बड़हल ( अम्ल क ), सूअर की आंख, जुगूनू और काली शारिवा नामक औषधि को एक साथ मिलाकर आंख में लगाने से रात में सभी चीजें दिखाई देती हैं ।
( ३ ) तीन रात तक उपवास करने वाला व्यक्ति पुष्य नक्षत्र में हथियार से मारे हुए अथवा फाँसी पर चढ़ाये गये आदमी की खोपड़ी में मिट्टी भर कर उसमें जौ बो दे और उसको भेंड़ के दूध से सींचता जाय । जब वे जौ उग आते हैं तब उनकी माला पहिन कर चलने वाले व्यक्ति की न तो छाया दिखाई देती है और न रूप ही ।
( ४ ) अथवा तीन रात तक उपवास करने वाला व्यक्ति पुष्य नक्षत्र में कुत्ता,