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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 777 of 918

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Page 777

प्र० १६६-१६७ : अ० ४] शस्त्राग्निरसप्रणिधि ६९३

(१) दण्डमुख्यव्यञ्जनो वा 'पुत्रमभित्यक्तम्' इति-समानम् ।

(२) पक्वमांसिकौदनिकशौण्डिकापूपिकव्यञ्जना वा पण्यविशेषमव-घोषयित्वा परस्परसङ्घर्षेण कालिकं समर्घतरमिति वा परानाहूय रसेन स्वपण्यान्युपचारयेयुः ।

(३) सुराक्षीरदधिसर्पिस्तैलानि वा तद्व्यवहर्तृहस्तेषु गृहीत्वा स्त्रियो बालाश्च रसयुक्तेषु स्वभाजनेषु परिकिरेयुः, 'अनेनार्घेण विशिष्टं वा भूयो दीयताम्' इति तत्रैवावकिरेयुः ।

(४) एतान्येव वैदेहकव्यञ्जनाः पण्यविक्रयेणाहर्तारो वा हस्त्यश्वानां विधायवसेषु रसमासन्ना दद्युः ।

(५) कर्मकरव्यञ्जना वा रसाक्तं यवसमुदकं वा विक्रीणीरन् । चिर-संसृष्टा वा गोवाणिजका गवामजावीनां वा यूथान्यवस्कन्दकालेषु परेषां मोहस्थानेषु प्रमुञ्चेयुः । अश्वखरोष्ट्रमहिषादीनां दुष्टांश्च तद्व्यञ्जना वा


को पहिले विषरहित शराब दे और वाद में जब वे बेहोश हो जायें तब उन्हें विष-मिश्रित शराब दे ।

( १ ) अथवा सेनामुख्य के वेष में सभी गुप्तचर किसी वध्य पुरुष को अपना पुत्र बताकर बाकी कार्य उपर्युक्त विधि से संपन्न करे ।

( २ ) अथवा पका मांस, पका अन्न, शराब तथा विविध व्यंजन और मालपुआ या पकौड़े आदि बेचने के वेष में सभी गुप्तचर एक-दूसरे से होड़ लगाकर अपनी-अपनी दूकानों की खूब तारीफ कर कम-ज्यादे मूल्य पर अथवा उधार ही शत्रु के आदमियों को विष मिले पदार्थ खिला दें ।

( ३ ) स्त्री तथा बालक शराब, दूध, घी, दही तथा तेल आदि का व्यवहार करने वाले लोगों के हाथ से लेकर इन वस्तुओं को अपने जहरीले वर्तनों में डलवा दें और वाद में उनके साथ यह झगड़ा करें कि 'अमुक वस्तु हमें इतने मूल्य पर दो, नहीं तो हम खरीदा हुआ सामान भी लौटा देंगे ।' जब दुकानदार इस बात पर राजी न हों तो उन, शराब, दूध आदि वस्तुओं को उन्हीं दुकानदारों के वर्तनों में उलट दें, ऐसा करने से सभी चीजें जहरीली हो जायँगी ।

( ४ ) फिर छावनी के साथ व्यापारी वेष में रहने वाले गुप्तचर या शराब बेचने के बहाने दूसरे लोग इन्हीं सब जहरीली वस्तुओं को हाथो घोड़ों के राशन में मिलाकर उन्हें खिला दें ।

( ५ ) अथवा मजदूर के वेष में रहने वाले गुप्तचर विषमिश्रित घास अथवा जल बेचें, अथवा बहुत समय से मित्र बनकर रहने वाले गुप्तचर अपने गाय, बकरी के समूहों को मध्य रात्रि में मोहग्रस्त ( निद्राग्रस्त ) शत्रुओं को व्याकुल करने के लिए छोड़ दें । इसी प्रकार व्यापारी वेष में रहने वाले गुप्तचर अपने घोड़ा, गधा, ऊँट