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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 778 of 918

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Page 778
६९४कौटिल्य का अर्थशास्त्र[ बारहवां अधिकरण

चुचुन्दरीशोणिताक्ताक्षान्, लुब्धकव्यञ्जना वा व्यालमृगान् पञ्जरेभ्यः प्रमुञ्चेयुः, सर्पग्राहा वा सर्पानुग्रविषान्, हस्तिजीविनो वा हस्तिनः ।
(१) अग्निजीविनो वा अग्निमवसृजेयुः ।
(२) गूढपुरुषा वा विमुखान् पत्त्यश्वरथद्विपमुख्यानभिहन्युः, आदीपये- युर्वा मुख्यावासान् । दूष्यामित्राटविकव्यञ्जनाः प्रणिहिताः पृष्ठाभिघात- मवस्कन्दप्रतिग्रहं वा कुर्युः । वनगूढा वा प्रत्यन्तस्कन्धमुपनिष्कृष्याभिहन्युः ।
(३) एकायने वीवधासारप्रसारान् वा । ससङ्केतं वा रात्रियुद्धे भूरितूर्य- माहत्य ब्रूयुः—'अनुप्रविष्टाः स्मो, लब्धं राज्यम्' इति । राजावासमनु- प्रविष्टा वा सङ्कुलेषु राजानं हन्युः ।
(४) सर्वतो वा प्रयातमेनं म्लेच्छाटविकदण्डचारिणः सत्रापाश्रयाः स्तम्भवटापाश्रया वा हन्युः । लुब्धकव्यञ्जना वावस्कन्दसङ्कुलेषु गूढयुद्ध- हेतुभिरभिहन्युः ।


तथा गाय, भैंस आदि चौंकने वाले जानवरों की आँखों में छछून्दर के खून का अञ्जन लगाकर छोड़ दें; इसी प्रकार शिकारी के वेष में रहने वाले गुप्तचर अपने हिंसक जानवरों को छोड़ दें; संपेरों के वेष में रहने वाले गुप्तचर अपने जहरीले साँपों को; और हाथियों के व्यापारी गुप्तचर अपने हाथियों को छोड़ दें ।

( १ ) इसी प्रकार रसोइये, लुहार आदि, जो गुप्तचर आग से अपनी जीविका चलाते हों, वे शत्रु की छावनी में आग लगा दें ।

( २ ) गुप्तचरों को चाहिए कि वे युद्ध से विमुख हुए पैदल, घुड़सवार, रथसवार तथा हाथीसवार सेनाओं के अध्यक्षों को मार डालें; अथवा उनके घरों में आग लगा दें; अथवा दूष्य, शत्रु या आटविक के वेष में रहने वाले गुप्तचर युद्ध से लौटी हुई सेना के पीछे से धावा बोल दें; अथवा सोते समय उसको नष्ट कर दें; अथवा उसका मुकाबला करें; अथवा बन में छिप कर रहने वाले गुप्तचर सरहदी इलाकों की सुरक्षा के लिए नियुक्त सेना को किसी बहाने अपनी ओर खींच कर मार डालें ।

( ३ ) जिस समय वीवध ( धान्य ), आसार ( मित्रसेना ) और प्रसार ( लकड़ी घास ) आदि को किसी तंग रास्ते से ले जाया जा रहा हो उस समय उसे नष्ट कर दिया जाय; अथवा रात्रि युद्ध में विशेष संकेतों के साथ बाजों को खूब जोर से बजाते हुए इस प्रकार की घोषणा की जाय कि 'हम लोग शत्रु दल को चीर कर भीतर प्रविष्ट हो गये हैं; हमने राज्य को प्राप्त कर लिया है' इत्यादि । अथवा राजा के घर में प्रविष्ट होकर उसको मार दिया जाय ।

( ४ ) जिस ओर से भी राजा भागे, वहीं से सत्र तथा स्तम्भवट को लेकर सैनिक के वेष में घूमने वाले म्लेच्छ और आटविक उसको मार डालें, अथवा शिकारी