Skip to content
SarvaKosh
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 232 of 918

Read in context
Page 232
१४८कौटिल्य का अर्थशास्त्र[ दूसरा अधिकरण

तीक्ष्णं चास्य मयूरग्रीवाभं श्वेतभङ्गं चिमिचिमायितं पीतचूर्णितं काकणिकः सुवर्णरागः।
(१) तारमुपशुद्धं वा। अस्थिन्तुत्थे चतुः, समसीसे चतुः, शुष्कतुत्थे चतुः, कपाले त्रिर्गोमये द्विः, एवं सप्तदशतुत्थातिक्रान्तं सैन्धविकयोज्ज्वलितम्। एतस्मात्काकण्युत्तरापसारिता। आ द्विभाषादिति सुवर्णे देयं, पश्चाद्रागयोगः। श्वेततारं भवति।
(२) त्रयोंऽशाः तपनीयस्य द्वात्रिंशद्भागश्वेततारमूर्च्छितं तत् श्वेतलोहितकं भवति। ताम्रं पीतकं करोति।
(३) तपनीयमुज्जवाल्य रागत्रिभागं दद्यात्। पीतरागं भवति।
(४) श्वेततारभागौ द्वावेकस्तपनीयस्य मुद्गवर्णं करोति।

या सिंधदेश की मिट्टी के साथ घिसकर उसे शुद्ध किया जाय। इस सुवर्ण के साथ इस्पाती लोहा भी नील, पीत आदि आभूषणों के योग्य होता है। इस्पाती लोहा मोर की गर्दन के समान आकृति का और काटने पर श्वेत, चमकता हुआ होना चाहिये। यदि गरम करके उसका चूर्ण बनाया जाय और उसको एक काकिणी सोने में मिला दिया जाय तो सोने का रङ्ग खिल उठता है।

(१) लोहे के स्थान पर शुद्ध चाँदी भी मिलाई जा सकती है। हड्डी के चूर्ण के साथ मिली हुई मिट्टी से बनी हुई घरिया में चार बार, मिट्टी और सीसे से बनी घरिया में चार बार, शुद्ध मिट्टी से बनी घरिया में तीन बार और गोबर में तीन बार—इस प्रकार सत्रह बार घरिया में बदलने के बाद सिंधदेश की खारी मिट्टी में रगड़ देने से श्वेतवर्ण की शुद्ध रूप्यधातु तैयार हो जाती है। उसमें से एक काकिणी चाँदी सोने में मिलाई जा सकती है। इस प्रकार दो माष तक चाँदी मिलाकर उतना सोना निकाला जा सकता है। इस प्रकार सोने में चाँदी मिला देने से और तदनन्तर उसको चमका देने वाली चीजों के सहयोग से सुवर्ण भी चाँदी की तरह चमकने लगता है।

(२) बत्तीस भागों में विभक्त साधारण सोने में तीन भाग निकालकर उनकी जगह तीन भाग शुद्ध सोना और शेष चाँदी को एक साथ मिलाकर घरिया में उलटने-पुलटने से उसका रङ्ग श्वेत-लाल मिश्रित रङ्ग का हो जाता है। यदि पूर्वोक्त रीति से चाँदी के साथ या तांबे को सोने में मिला दिया जाय तो वह उसके रङ्ग को पीला बना देता है।

(३) साधारण सोने को खारी मिट्टी से चमका कर उसमें शुद्ध सोने का तीसरा भाग मिला दिया जाय तो उसका रंग लाल-पीला हो जाता है।

(४) दो भाग शुद्ध चाँदी में एक भाग सोने को मिला कर भावना देने से उसका रङ्ग मूंग के समान हो जाता है।